देश की खबरें | न्यायालय ने प. बंगाल सरकार के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली निवासी को भेजे सम्मन पर लगाई रोक
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के बारे में फेसबुक पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में दिल्ली की एक निवासी को जांच अधिकारी द्वारा वहां तलब किये जाने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अदालतों को पुलिस जांच के मामले में न्यायिक समीक्षा करते समय संयम बरतना चाहिए। पीठ ने कहा कि अदालत को हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(ए) में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की अवश्य रक्षा करनी चाहिए।

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पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल लोगों को डराने, धमकाने और परेशान करने के लिये नहीं हो।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी यह सुविचारित राय है कि इस मामले में सामने आये तथ्यों के मद्देनजर याचिकाकर्ता के लिये इस समय उच्च न्यायालय में कार्यवाही लंबित होने के दौरान धारा 41ए के तहत भेजे गये सम्मन का अनुपालन करने की जरूरत नहीं है।’’

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पीठ ने कहा, ‘‘अत: हम याचिकाकर्ता को बालीगंज थाने में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देश के अमल पर अंतरिम रोक लगाते हैं।’’

न्यायालय ने कहा कि यह राहत इस शर्त के साथ है कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी द्वारा उसके पास भेजे गये सवालों के जवाब देने का आश्वासन देगी और अगर जरूरी हुआ तो 24 घंटे के पूर्व नोटिस पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इनका जवाब देगी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि उनकी मुवक्किल हर तरह से सहयोग करेगी, हालांकि पांच जून, 2020 के बाद से पांच महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक कोई सवाल नहीं किये गये हैं।

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने कहा कि जांच अधिकारी को अगर आवश्यक हो तो कथित फेसबुक पोस्ट के संबंध में याचिकाकर्ता से कुछ बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिये दिल्ली आने की छूट प्रदान की जाये।

शीर्ष अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि इस बारे में 24 घंटे का पूर्व नोटिस दिये जाने पर याचिकाकर्ता के वकील को कोई आपत्ति नहीं है और इसी के साथ पश्चिम बंगाल सरकार का यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।

याचिकाकर्ता को बालीगंज थाने के जांच अधिकारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए के तहत सम्मन जारी किये थे।

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में स्पष्ट रूप से दो पोस्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजाबाजार में लॉकडाउन का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और इस दौरान हजारों लोग एक साथ निकले हैं और इससे सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य प्रशासन इस संबंध में कुछ करेगा।

शीर्ष अदालत दिल्ली निवासी रोहिणी बिश्वास की अपील पर सुनवाई कर रही थी। बिश्वास ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें बालीगंज थाने के जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था।

अनूप

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