देश की खबरें | पारिवारिक अदालतों को संदर्भित किये बिना तलाक के मुद्दे पर सोमवार को फैसला सुना सकता है न्यायालय
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नयी दिल्ली, 30 अप्रैल उच्चतम न्यायालय सोमवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुना सकता है, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उपलब्ध अपने व्यापक अधिकार का इस्तेमाल करके शीर्ष अदालत पारिवारिक अदालतों को संदर्भित किये बिना किसी दंपती को सहमति के आधार पर तलाक का आदेश दे सकती है या नहीं?
न्यायमूर्ति एस. के. कौल की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ इस कानूनी पहलू पर भी अपना फैसला देगी कि क्या प्रावधान के तहत शीर्ष अदालत की व्यापक शक्तियों को उन परिदृश्यों में बाधित किया जा सकता है, जहां शादी लगभग टूट गयी होती है, लेकिन एक पक्ष तलाक देना नहीं चाहता।
संविधान का अनुच्छेद 142 किसी भी लंबित मामले में ‘पूर्ण न्याय’ करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के लागू करने से संबंधित है।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट के अनुसार, संविधान पीठ सोमवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाएगी। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति ए एस ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी भी शामिल हैं।
संविधान पीठ की ओर से न्यायमूर्ति खन्ना द्वारा फैसला सुनाने की उम्मीद है। संविधान पीठ ने 29 सितंबर, 2022 को पांच याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिनमें 2014 में शिल्पा शैलेश की ओर से दायर मुख्य याचिका भी शामिल है।
अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था कि सामाजिक परिवर्तन में 'थोड़ा समय' लगता है और कभी-कभी कानून लाना आसान होता है, लेकिन समाज को इसके साथ बदलने के लिए राजी करना मुश्किल होता है।
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