देश की खबरें | न्यायालय ने अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने के लिए अत्यधिक शुल्क लेने संबंधी याचिका पर नोटिस जारी किया
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नयी दिल्ली, पांच जुलाई विधि स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने के लिए राज्यों की बार काउंसिल द्वारा कथित तौर पर अत्यधिक शुल्क लिये जाने को चुनौती देने वाले लंबित मामले विभिन्न उच्च न्यायालयों से शीर्ष न्यायालय को हस्तांतरित करने संबंधी ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (बीसीआई) की एक याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को नोटिस जारी किया।
पंजीकरण शुल्क के मुद्दे पर केरल, मद्रास और बंबई उच्च न्यायालयों में अलग-अलग याचिकाएं दायर करने वालों को नोटिस जारी करते हुए प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि राज्यों की बार काउंसिल कल्याण योजनाओं के नाम पर अधिक पंजीकरण शुल्क नहीं ले सकती हैं।
बीसीआई ने तीन उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाएं शीर्ष न्यायालय को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है।
पीठ ने हस्तांतरण याचिका पर नोटिस जारी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार की दलीलों का संज्ञान लिया। पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
बीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि राज्यों की बार काउंसिल द्वारा लिये जा रहे शुल्क में कई खर्चें और कल्याण योजनाएं शामिल हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘आप (कल्याण योजनाओं के लिए) पंजीकरण शुल्क के रूप में ये शुल्क नहीं ले सकते। आप कल्याण योजनाएं आदि के लिए (शुल्क) ले सकते हैं, लेकिन पंजीकरण शुल्क के रूप में नहीं...।’’
पीठ ने संबद्ध मामलों में उच्च न्ययालयों में कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि याचिका हस्तांतरित करने के विषय पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नोटिस जारी करने की बात कहे जाने पर उच्च न्यायालय आमतौर पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ाते।
केरल उच्च न्यायालय ने अपने एक हालिया आदेश में राज्य बार काउंसिल को विधि स्नातकों से केवल 750 रुपये पंजीकरण शुल्क लेने का निर्देश दिया है।
इससे पहले, 10 अप्रैल को शीर्ष न्यायालय ने बीसीआई और अन्य को एक अलग याचिका पर नोटिस जारी किया था। याचिका में, देशभर में विधि स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत करने के लिए अत्यधिक शुल्क लिये जाने को चुनौती दी गई थी।
यह याचिका गौरव कुमार नाम के व्यक्ति ने दायर की थी।
पीठ ने कहा, ‘‘हम इस पर नोटिस जारी करेंगे। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। याचिका में कहा गया है कि अत्यधिक शुल्क अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 24 का उल्लंघन करता है।’’
याचिका में उल्लेख किया गया है कि ओडिशा में पंजीकरण शुल्क 41,100 रुपये है और केरल में 20,050 रुपये लिया जा रहा है।
याचिका में सभी राज्यों की बार काउंसिल को पक्षकार बनाया गया है।
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