देश की खबरें | अदालत ने बांग्ला अभिनेत्री को निजता के हनन से सुरक्षा प्रदान की

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नयी दिल्ली, 26 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने यूट्यूब सहित विभिन्न ऑनलाइन मंचों से एक बांग्ला अभिनेत्री के कुछ आपत्तिजनक वीडियो और ऑडियो क्लिप हटाने का निर्देश देते हुए कहा है कि निजता के अधिकार में भूल जाने और अकेले रहने देने का अधिकार शामिल है।

अदालत ने एक अंतरिम आदेश में कहा कि अभिनेत्री निजता पर प्रतिवादी मंचों और अन्य लोगों द्वारा हमला से बचाव की हकदार हैं क्योंकि निजता पर हमला से उनकी प्रतिष्ठा पर स्पष्ट और तत्काल प्रभाव पड़ता है।

अभिनेत्री ने यूट्यूब सहित विभिन्न वेबसाइटों, मोबाइल एप्लिकेशन और ऑनलाइन मंचों पर अपने आपत्तिजनक वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए एक याचिका दायर की है।

न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि इन परिस्थितियों में और इस तथ्य के मद्देनजर कि वादी (अभिनेत्री) 'अकेले रहने' और 'भूल जाने' की हकदार है, वह अजनबियों और गुमनाम कॉल करने वालों से अपनी निजता पर हमले से सुरक्षा की हकदार है।

महिला के वकील ने दावा किया कि वह एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं, खासकर बांग्ला फिल्मों में और एक प्रोडक्शन हाउस ने एक वेब-सीरिज के लिए उनसे संपर्क किया था। वकील ने दलील दी वेब-सीरीज़ में मुख्य भूमिका देने के लिए महिला से किए गए वादे के अनुसार वादी को एक वीडियो या ट्रेलर में भाग लेने को कहा गया जिसमें कुछ खुले दृश्य शामिल थे। हालांकि परियोजना नाकाम हो गई और वेब-सीरीज़ का निर्माण नहीं हुआ।

याचिका में कहा गया है कि दिसंबर, 2020 में, महिला को उन वीडियो के बारे में पता चला जो निर्माता ने अपने यूट्यूब चैनल और वेबसाइट पर अपलोड किए थे। बाद में अभिनेत्री के अनुरोध पर निर्माता ने उन क्लिप को हटा दिया।

हालांकि, महिला की सहमति के बिना, विभिन्न वेबसाइट ने वीडियो अपलोड किए हैं और उनमें से कुछ ने उन पर आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां भी पोस्ट की हैं।

अदालत ने ऑनलाइन मंचों और अन्य को 22 सितंबर तक ऐसे वीडियो व ऑडियो क्लिप हटाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने महिला को यह आदेश अन्य इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मंचों को भेजने की अनुमति दी, अगर वे वीडियो का प्रसारण करते पाए जाते हैं।

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