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अधिकरणों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होने पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों में रिक्त पदों का भी जिक्र किया और कहा कि कई बार उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम और सरकार एक राय नहीं होते जिसकी वजह से बड़ी संख्या में सिफारिशें अधर मे अटक जाती है।

अधिकरणों में रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होने पर न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त की
जमात

नयी दिल्ली, पांच मई उच्चतम नयायालय ने अधिकरणों से सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के कारण रिक्त हुए पदों पर नियुक्तियां नहीं किए जाने पर मंगलवार को अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सरकार न्यायापालिका के हाथ से काम लेने के प्रयास में लगातार इस तरह के मंचों का सृजन कर रही है लेकिन उनका प्रबंध नहीं कर पा रही है।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों में रिक्त पदों का भी जिक्र किया और कहा कि कई बार उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम और सरकार एक राय नहीं होते जिसकी वजह से बड़ी संख्या में सिफारिशें अधर मे अटक जाती है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग के सदस्य वी के जैन के कार्यकाल को तीन महीने का सेवाविस्तार देते हुये यह टिप्पणियां कीं। वी के जैन का कार्यकाल 29 मई को पूरा हो रहा था।

पीठ ने सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह इन रिक्त स्थानों पर नियुक्तयों के बारे में सकारात्मक निर्देश प्राप्त करें। पीठ ने इस मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद करने का निश्चय किया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग में इस समय 11 सदस्यों में से सात पद रिक्त हैं। रिक्त पदों में तीन न्यायिक और चार गैर न्यायिक सदस्यों के पद हैं।

पीठ ने कहा कि वह सालिसीटर जनरल ने कहेगी कि वह इन रिक्तियों पर नियुक्तियों के बारे में निर्देश प्राप्त करें। साथ ही पीठ ने कहा कि यह ऐसी समस्या है जिसकी वजह से अधिकरणों का कामकाज लगभग ठप हो गया है।

मेहता ने इस समस्या को स्वीकार करते हुये इस पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया और पीठ से अनुरोध किया कि सरकार द्वारा कुछ कदम उठाये जाने तक आयोग के सदस्य का कार्यकाल बढ़ा दिया जाये।

मेहता ने कहा कि वह अधिकरणों में रिक्त स्थानों की समस्या के प्रति न्यायालय की चिंता से सरकार को अवगत करा देंगे।

पीठ ने कहा कि न्यायपालिका का काम अपने हाथ में लेने के लिये सरकार नये नये अधिकरण बनाती रहती है लेकिन उसके पास इसके लिये आदमी नहीं है और इस वजह से अधिकरणों में काम ठप हो जाता है।

पीठ ने कहा कि कोविड-19 समस्या के अपने अलग प्रभाव होंगे लेकिन रिक्त स्थानों पर नियुक्तियां नहीं करना एक समस्या को जन्म देना है और न्यायालय को इस पर अपनी नाराजगी व्यक्त करनी चाहिए।

पीठ ने ओड़ीसा उच्च न्यायालय स्तर पर रिक्तयां भरने के मामले में ओड़ीसा उच्च न्यायालय के संबंध में दिये गये आदेश का जिक्र किया और कहा कि उसे नियुक्ति करने के लिये सरकार पर दबाव डालना पड़ा।

पीठ ने कहा कि सरकार ने उस वक्त न्यायालय से कहा था कि उच्च न्यायालय सिफारिशें भेजने में बहुत ज्यादा वक्त लेते हैं और इसकी वजह से रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने में विलंब होता है।

अनूप

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(The above story first appeared on LatestLY on May 05, 2020 06:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).