देश की खबरें | न्यायालय ने मुकदमे सूचीबद्ध करने में दुराग्रह के आरोपों वाली याचिका खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मुकदमों को सूचीबद्ध करने में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के अधिकारियों पर दुराग्रह के आरोप लगाने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने साथ ही आरोप लगाने वाले वकील पर सौ रूपए का जुर्माना भी किया।

नयी दिल्ली, छह जुलाई उच्चतम न्यायालय ने मुकदमों को सूचीबद्ध करने में शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री के अधिकारियों पर दुराग्रह के आरोप लगाने वाली याचिका सोमवार को खारिज कर दी। न्यायालय ने साथ ही आरोप लगाने वाले वकील पर सौ रूपए का जुर्माना भी किया।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने अधिवक्ता रीपल कंसल की जनहित याचिका खारिज कर दी। साथ ही इस तरह की याचिका दायर करने पर अधिवक्ता पर सौ रूपए का जुर्माना भी लगाया।

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कंसल ने बताया कि तकनीकी गड़बड़ी की वजह से पीठ ने अपना फैसला नहीं सुनाया और इसकी जानकारी उन्हें टेलीफोन के जरिये दी गयी।

याचिकाकर्ता वकील ने कहा कि पीठ ने कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है।

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कंसल ने याचिका में आरोप लगाया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान चुनौती भरे दौर में न्यायालय में याचिकाओं को सूचीबद्ध करने के मामले में प्रभावशाली अधिवक्ताओं और याचिकाकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाती है।

शीर्ष अदालत ने कंसल की याचिका पर नौ जून को सुनवाई के बाद कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा।

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस तरह के आरोपों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा था कि उसकी रजिस्ट्री वादियों और अधिवक्ताओं की मदद के लिये दिन रात काम कर रही है।

अनूप

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