देश की खबरें | अदालत ने बीएमसी को नारायण राणे के बंगले में हुए अवैध निर्माण को दो हफ्ते में गिराने का दिया निर्देश

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मुंबई, 20 सितंबर बंबई उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के मुंबई के जुहू इलाके में स्थित बंगले में किए गए अवैध निर्माण को दो सप्ताह के भीतर गिराने का मंगलवार को निर्देश दिया। अदालत ने राणे पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने कहा कि निर्माण में ‘फ्लोर स्पेस इंडेक्स’ (एसएसआई) और ‘कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन’ (सीआरजेड) नियमों का उल्लंघन किया गया है।

‘फ्लोर स्पेस इंडेक्स’ (एसएसआई) वह अनुमेय सीमा है, जिसके तहत विशेष भूखंड या भूमि के टुकड़े पर निर्माण किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति आर. डी. धानुका और न्यायमूर्ति कमाल ख़ता की एक खंडपीठ ने कहा, ‘‘इसमें कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता ने स्वीकृत योजना और कानून के प्रावधानों का घोर उल्लंघन करते हुए व्यापक पैमाने पर अनधिकृत निर्माण किया है।"

पीठ ने कहा कि अनधिकृत निर्माण को बरकरार रखने या उसे नियमित करने के प्रस्ताव को अगर स्वीकार किया जाता है तो यह मुंबई शहर में कानूनी प्रावधानों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन और दंडात्मक कार्रवाई के डर के बिना किसी भी हद तक अनधिकृत निर्माण को प्रोत्साहन देने के समान होगा।

इससे पहले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने अदालत से कहा था कि वह केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे के जुहू बंगले में अनधिकृत निर्माण को नियमित करने के लिए दूसरे आवेदन पर सुनवाई के लिए तैयार है। हालांकि, इस संबंध में पहला आवेदन खारिज कर दिया गया था।

पीठ ने मंगलवार को कहा कि अगर बीएमसी के रुख को स्वीकार कर लिया जाता है, तो इस शहर का कोई भी निवासी पहले बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण करने के बाद फिर नियमितीकरण की मांग कर सकता है। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि वह नगर निकाय के इस रुख से 'आश्चर्यचकित' है।

अदालत ने बीएमसी को दो सप्ताह के भीतर अनधिकृत हिस्से को गिराने और उसके एक सप्ताह बाद अदालत को अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

पीठ ने राणे पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और इस राशि को दो सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का निर्देश दिया।

राणे के वकील शार्दुल सिंह ने अदालत से छह सप्ताह के लिए अपने आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया, ताकि वह उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल कर पाएं। हालांकि, अदालत ने उनका अनुरोध खारिज कर दिया।

अदालत ने राणे के परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी ‘कालका रियल एस्टेट्स’ की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बीएमसी से उसके पूर्व आदेश से प्रभावित हुए बिना, बंगले में अनधिकृत निर्माण को नियमित करने के उसके दूसरे आवेदन पर विचार करने का अनुरोध किया गया था।

इससे पहले बीएमसी ने जून में कंपनी के नियमितीकरण आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि निर्माण में उल्लंघन किया गया है। इसके बाद कंपनी ने जुलाई में दूसरा आवेदन दाखिल किया था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बीएमसी का दूसरे आवेदन पर विचार करने का रुख उसके पहले आवेदन को खारिज करने के स्वयं के आदेश के विरुद्ध है।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस साल जून में बीएमसी के पहले आदेश को स्वीकार कर लिया था।

अदालत ने कहा, ‘‘ अगर नियमितीकरण आवेदन को सुनने की अनुमति दी जाती है..जिसे बीएमसी अनुमति देने पर आमादा है, तो इससे बड़े पैमाने पर अनधिकृत संरचनाओं के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।’’

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता (राणे के स्वामित्व वाली कंपनी) ने एफएसआई की अनुमेय सीमा का तीन गुना निर्माण किया है और इसके लिए बीएमसी, दमकल विभाग से और पर्यावरण संबंधी मंजूरी भी नहीं ली गई।

अदालत ने कहा कि अगर ऐसे आवेदनों को मंजूरी दी गई तो इससे ऐसे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और घर खरीदने वाले अन्य लोग भी अपने मकानों में ऐसे अवैध बदलाव करेंगे।

उच्च न्यायालय ने पिछले महीने याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा था कि बीएमसी पहले आवेदन को खारिज करने के उसके फैसले को उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद दूसरे आवेदन पर कैसे विचार कर सकती है।

उच्च न्यायालय ने बीएमसी के पहले दिए फैसले को स्वीकार करते हुए कहा था कि निर्माण प्रथम दृष्टया अवैध प्रतीत होता है।

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