देश की खबरें | न्यायालय ने आईआईटी-आईआईएम में खुदकुशी की घटनाओं को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने देश के विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में खुदकुशी की घटनाओं को ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार देते हुए इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए शुक्रवार को मजबूत प्रणाली बनाने का आश्वासन दिया।
नयी दिल्ली, 28 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने देश के विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में खुदकुशी की घटनाओं को ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ करार देते हुए इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए शुक्रवार को मजबूत प्रणाली बनाने का आश्वासन दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने बताया कि पिछले 14 महीनों में विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में 18 आत्महत्याएं हुई हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘जो कुछ हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इस स्थिति की जांच के लिए एक मजबूत प्रणाली बनाएंगे। हम इस मुद्दे को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएंगे।’’
जाति आधारित भेदभाव का सामना करने के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले छात्र रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की ओर से पेश जयसिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने अदालत के आदेश के बावजूद अपने परिसरों में होने वाली आत्महत्याओं पर पूरा डेटा नहीं दिया है।
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पीएचडी स्कॉलर वेमुला की 17 जनवरी, 2016 को मृत्यु हो गई थी, जबकि टीएन टोपीवाला नेशनल मेडिकल कॉलेज की छात्रा पायल की 22 मई, 2019 को मृत्यु हो गई थी। पायल के साथ उसके कॉलेज के तीन चिकित्सकों द्वारा कथित रूप से भेदभाव किया गया था।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मसौदा नियम तैयार किए हैं, जिसमें याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई अधिकांश चिंताओं का ध्यान रखा गया है और इसे इसकी वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इन मसौदा नियमों को लेकर जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
जयसिंह ने कहा कि 40 प्रतिशत विश्वविद्यालयों और 80 प्रतिशत कॉलेजों ने अपने परिसरों में समान अवसर प्रकोष्ठ नहीं बनाए हैं। पीठ ने जयसिंह और मामले में उपस्थित अन्य वकीलों से मसौदा नियमों पर सुझाव देने को कहा और यूजीसी को इन सुझावों पर गौर करने का निर्देश दिया।
जयसिंह ने अदालत से नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अगर अनुमति दी गई तो हर दूसरा व्यक्ति व्यक्तिगत सुनवाई की मांग करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो वे वेबसाइट के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।’’
न्यायालय मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद करेगा।
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