देश की खबरें | न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी के खिलाफ दायर मामला बंद किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को दो दिन पहले ही रिहा किये जाने के तथ्य का संज्ञान लेते हुये पीडीपी की नेता की नजरबंदी के खिलाफ उनकी बेटी इल्तिजा की याचिका की फाइल बृहस्पतिवार को बंद कर दी।
नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को दो दिन पहले ही रिहा किये जाने के तथ्य का संज्ञान लेते हुये पीडीपी की नेता की नजरबंदी के खिलाफ उनकी बेटी इल्तिजा की याचिका की फाइल बृहस्पतिवार को बंद कर दी।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ को जब केन्द्र शासित प्रदेश और इल्तिजा के वकील ने महबूबा की रिहाई के बारे में सूचित किया तो पीठ ने कहा, ‘‘अच्छा है।’’
महबूबा को मंगलवार की रात में रिहा कर दिया गया क्योंकि केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने उनके खिलाफ जन सुरक्षा कानून के तहत आरोप वापस ले लिये। जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने के केन्द्र के फैसले के बाद वह एक साल से भी ज्यादा समय से नजरबंद थी।
इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, ‘‘अब आपने उन्हें रिहा कर दिया है?’’ मेहता ने इस पर ‘‘हां’’ में जवाब दिया
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याचिकाकर्ता की वकील नित्या रामकृष्णा ने भी कहा कि सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया है।
पीठ ने इसके बाद यह कहते हुये याचिका का निस्तारण कर दिया कि उन्हें रिहा कर दिया गया है।
न्यायालय ने 29 सितंबर को महबूबा मुफ्ती की जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंदी के खिलाफ उनकी पुत्री इल्तिजा मुफ्ती की याचिका पर टिप्पणी की कि यह नजरबंदी हमेशा के लिये नहीं रह सकती और इसका कोई तरीका खोजना चाहिए। न्यायालय ने प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिये 15 दिन का समय देते हुये जानना चाहा था कि कि इस विशेष कानून के तहत किसी व्यक्ति को कितने समय तक नजरबंद रखा जा सकता है।
महबूता मुफ्ती को जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 370 के अनेक प्रावधान समाप्त करने और इस राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभक्त करने के पिछले साल पांच अगस्त के सरकार के फैसले से पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में छह फरवरी को उनके खिलाफ जनसुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।
इससे पहले, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके पिता फारूख अब्दुल्ला को भी जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद किया गया था लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।
अनूप
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