देश की खबरें | अदालत ने दिल्ली सरकार से ‘अधिवक्ता संरक्षण विधेयक’ के मसौदे पर हितधारकों से परामर्श करने को कहा

नयी दिल्ली, 25 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार से ‘अधिवक्ता संरक्षण विधेयक’ के मसौदे की पड़ताल करने और हितधारकों से परामर्श करने को कहा।

अप्रैल में एक अधिवक्ता की हत्या के मद्देनजर वकीलों की सुरक्षा के लिए एक बेहतर माहौल सुनिश्चित करना इस विधेयक का उद्देश्य है।

उच्च न्यायालय को सूचित किया गया कि राष्ट्रीय राजधानी में जिला न्यायालय बार संघों की समन्वय समिति ने विधेयक का मसौदा तैयार किया है और इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री और कानून मंत्री को भेजा गया है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने कहा, ‘‘मसौदा विधेयक की पड़ताल के लिए दिल्ली सरकार को कदम उठाने चाहिए और हितधारकों से परामर्श करना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘‘विधेयक के मसौदे पर हितधारकों से चर्चा के बाद की गई कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल किया जाये। मामले को छह सितंबर को सूचीबद्ध किया जाये।’’

जिला न्यायालय बार संघों की समन्वय समिति का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता के. सी. मित्तल ने अदालत को सूचित किया कि विधेयक का पहला मसौदा मुख्यमंत्री और कानून मंत्री को विचार के लिए भेजा गया है।

उच्च न्यायालय अधिवक्ताओं की सुरक्षा और उनके लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के वास्ते एक कानून बनाने के अनुरोध संबंधी वकीलों दीपा जोसेफ और अल्फा फिरिस दयाल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 अप्रैल को केंद्र और दिल्ली सरकार से इन दो वकीलों की याचिका पर अपना रुख बताने को कहा था।

न्यायालय ने साथ ही दिल्ली बार काउंसिल और जिला बार संघों की समन्वय समिति से एक स्थिति रिपोर्ट भी मांगी थी, जिसने कहा था कि वे एक ‘‘अधिवक्ता संरक्षण विधेयक’’ का मसौदा तैयार करने और अधिकारियों के साथ मशविरा करने की प्रक्रिया में पहले से ही हैं।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील रॉबिन राजू ने पहले अदालत को सूचित किया था कि राजस्थान ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए पहले ही एक कानून बनाया है।

गौरतलब है कि वकील वीरेंद्र कुमार नरवाल (53) की एक अप्रैल को मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के द्वारका में गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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