देश की खबरें | न्यायालय की एनएलएटी-2020 के आयोजन को हरी झंडी लेकिन एनएलएसआइयू को इसके नतीजे घोषित करने से रोका

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बेंगलुरू को शनिवार को अलग से एनएलएटी-2020 प्रवेश परीक्षा के आयोजन की अनुमति प्रदान कर दी लेकिन उसे इस याचिका के लंबित होने के दौरान परीक्षा के नतीजे घोषित करने और किसी भी छात्र को प्रवेश देने से रोक दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बेंगलुरू को शनिवार को अलग से एनएलएटी-2020 प्रवेश परीक्षा के आयोजन की अनुमति प्रदान कर दी लेकिन उसे इस याचिका के लंबित होने के दौरान परीक्षा के नतीजे घोषित करने और किसी भी छात्र को प्रवेश देने से रोक दिया।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने अलग से परीक्षा कराने के एनएलएसआईयू के फैसले के खिलाफ एनएलएसआईयू के पूर्व कुलपति प्रो आर वेंकट राव और एक छात्र के पिता राकेश कुमार अग्रवाल की याचिका पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई की और कहा कि यह महत्वपूर्ण मामला है जिस पर फैसले की जरूरत है।

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पीठ ने इसके साथ ही इन याचिका पर यूनिवर्सिटी और इसके कुलपति प्रो सुधीर कृष्णास्वामी को नोटिस जारी किये। पीठ ने तीन दिन के भीतर उनसे नोटिस के जवाब मांगे हैं। इस याचिका पर अब 16 सितंबर को आगे सुनवाई होगी।

पीठ ने कहा कि चूंकि यह परीक्षा शनिवार को हो रही है, इसका आयोजन किया जा सकता है लेकिन इसके नतीजे की न तो घोषणा होगी और न ही किसी छात्र को प्रवेश दिया जा सकता है।।

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सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘हम इस पर नोटिस जारी करना चाहते हैं। यह महत्वपूर्ण मामला है। यह ऐसा मामला है जिस पर फैसला करने की जरूरत है।’’

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू के पूर्व कुलपति और अन्य ने अपनी याचिका में इस विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा अलग से कराने संबंधी अधिसूचना को पूरी तरह मनमाना और गैरकानूनी फैसला बताया है।

याचिका में कहा गया है कि एनएलएसयूआई की इस कार्रवाई ने एक अप्रत्याशित अनिश्चितता पैदा कर दी है और छात्रों पर भी अनावश्यक बोझ डाल दिया है जो अब भावी कार्यक्रम को लेकर अनिश्चय की स्थिति में हैं।

याचिका में कहा गया है कि प्रवेश परीक्षा के रूप में नेशनल लॉ एप्टीट्यूड परीक्षा कराने का निर्णय बगैर किसी सोच विचार के लिया गया है और सनक भरी वजहों से लिये गये इस निर्णय ने अंतिम क्षणों में छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है।

याचिका में कहा गया है कि कुलपति प्रो सुधीर कृष्णस्वामी का यह निर्णय इसे सिर्फ कुलीन संस्था बनाने के इरादे से लिया गया फैसला है जो सिर्फ उन लोगों के हित साधेगा जो परीक्षा मे शामिल हो सकेंगे जबकि इसने तमाम गरीब, सीमांत और उपेक्षित प्रत्याशियों की पूरी तरह अनदेखी की है।

अधिवक्ता विपिन नायर के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि प्रतिवादी संख्या दो (कृष्णास्वामी) का एकमात्र उद्देश्य एनएलएसआईयू को सर्वश्रेष्ठ संस्था बनाने की बजाय एक अपवाद संस्था बनाना है।

याचिका में पांच साल के बीए, एलएलबी (आनर्स) कार्यक्रम 2020-21 में प्रवेश के लिये जारी चार सितंबर की अधिसूचना निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी की वजह से नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कंसोर्टियम ने 21 अप्रैल को क्लैट 2020 के लिये ऑनलाइन आवेदन की तारीख 18 मई तक बढ़ा दी थी और परीक्षा की तारीख भी 21 जुलाई तक के लिये स्थगित कर दी गयी थी। इसके बाद इसे एक जुलाई तक बढ़ाया गया और परीक्षाओं की तारीख भी बढ़ा दी गयी थी।

याचिका के अनुसार, क्लैट 2020 की परीक्षा इसके बाद 28 सितंबर के लिये स्थगित कर दी गयी थी लेकिन एनएलएसआईयू ने जल्दबाजी में एकतरफा निर्णय लेते हुये बीए, एलएलबी कार्यक्रम में प्रवेश के लिये ऑनलाइन परीक्षा संबंधी अधिसूचना जारी कर दी।

अनूप

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