देश की खबरें | न्यायालय ने आम्रपाली समूह के पूर्व सीएमडी की एम्स में एक सप्ताह के भीतर सर्जरी करने की अनुमति दी

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नयी दिल्ली, नौ जून उच्चतम न्यायालय ने जेल में बंद आम्रपाली ग्रुप ऑफ कंपनीज के पूर्व सीएमडी अनिल कुमार शर्मा की एम्स में एक सप्ताह के भीतर हर्निया से संबंधित सर्जरी किए जाने की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने शर्मा की सर्जरी के दिन और उसके एक दिन बाद उनके परिचारक के रूप में उनकी पत्नी को उपस्थित रहने की भी अनुमति प्रदान कर दी।

शर्मा के वकील ने अपने मुवक्किल को चार सप्ताह के लिए जमानत देने का अनुरोध किया लेकिन पीठ ने इससे इनकार कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं।

पीठ ने शर्मा के वकील मनोज सिंह से कहा, "आपके पास गुण-दोष के आधार पर कोई मामला नहीं है। याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप हैं। यह केवल स्वास्थ्य कारणों से है कि अदालत उन्हें राहत दे रही है।’’

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने पीठ को सूचित किया कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार, सर्जरी से पहले की सभी सावधानियां बरतते हुए याचिकाकर्ता की सर्जरी की जा सकती है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम कोई जोखिम नहीं लेने जा रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी है। यह सर्जरी पूर्व सभी सावधानियां बरतते हुए एक सप्ताह के भीतर की जाएगी।’’

न्यायालय ने मामले को ग्रीष्म अवकाश के बाद आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया।

शीर्ष अदालत ने छह जून को शर्मा को हर्निया संबंधी सर्जरी के लिए जांच के वास्ते अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुसरण में 21 मार्च को स्थापित एम्स मेडिकल बोर्ड ने मंडोली जेल में बंद शर्मा की जांच की थी और सर्जरी की सिफारिश की थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उनका ऑपरेशन किया जाना चाहिए और इसके लिए उन्हें जांच के लिए डॉक्टरों के सामने पेश किया जाना चाहिए तथा सर्जरी की तारीख तय की जानी चाहिए।

अनेक गृह क्रेताओं द्वारा कदाचार और घर या फ्लैट की डिलीवरी नहीं करने का आरोप लगाए जाने के बाद शीर्ष अदालत संकटग्रस्त रियल एस्टेट कंपनी से संबंधित मामलों की निगरानी कर रही है।

शीर्ष अदालत के आदेश पर आम्रपाली के पूर्व समूह निदेशक अनिल कुमार शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार सलाखों के पीछे हैं।

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