देश की खबरें | न्यायालय गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय भारत में बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया।

नयी दिल्ली, 11 अप्रैल उच्चतम न्यायालय भारत में बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया।

याचिका में कहा गया है कि कानूनी जटिलताओं के कारण देश में हर साल मात्र 4000 बच्चे गोद लिये जाते हैं।

याचिकाकर्ता पीयूष सक्सेना एक एनजीओ ‘‘द टेंपल ऑफ हिलिंग’’ की ओर से पेश हुए और कहा कि उन्होंने बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को कई अभ्यावेदन दिए थे लेकिन अब तक इस संबंध में कोई भी कदम नहीं उठाया गया है।

इसके बाद न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी किया।

पीठ ने कहा, ‘‘हम देखेंगे कि इस मुद्दे पर सरकार का क्या कहना है।’’

सक्सेना ने कहा, “सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष मात्र 4000 बच्चे गोद लिए जाते हैं लेकिन पिछले साल तक हमारे देश में तीन करोड़ अनाथ बच्चे थे। कई निसंतान दंपती हैं।’’

पीठ ने कहा कि वह एक निकाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसका गोद लेने से क्या लेना-देना है।

सक्सेना ने कहा, ‘‘मैं ‘द टेंपल ऑफ हिलिंग’ में सचिव हूं और हम दान स्वीकार नहीं करते हैं या कोई पैसा नहीं लेते हैं और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से विभिन्न बीमारियों का इलाज करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि वे लोगों को बच्चा गोद लेने के लिए आवश्यक बोझिल कागजी कार्रवाई को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधायिका के मोर्चे पर एक विसंगति भी है क्योंकि गोद लेने की प्रक्रिया हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम 1956 के तहत चलाई जा रही है, जिसमें कानून और न्याय मंत्रालय के रूप में एक नोडल मंत्रालय है जबकि अनाथों के मामलों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देखता है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्हें वास्तविक चिंताएं हैं और उन्होंने बंबई उच्च न्यायालय में दत्तक ग्रहण मामलों के न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया।

पीठ ने सक्सेना से कहा कि उन्होंने अपनी बात रख दी है और अदालत नोटिस जारी कर रही है क्योंकि यह वास्तविक जनहित याचिका प्रतीत होती है और इसलिए वह सवाल पूछ रही थी।

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