देश की खबरें | अदालत ने एक व्यक्ति को हत्या के प्रयास के आरोप से किया बरी, लूट के लिए दोषी ठहराया
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नयी दिल्ली, 23 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को हत्या के प्रयास के आरोप से बरी करते हुए कहा कि किसी स्थिति की दो व्याख्याएं संभव होने की स्थिति में अदालत का झुकाव आरोपी के पक्ष में होगा।
अदालत ने, हालांकि उक्त व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 394 (लूट के दौरान जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 397 (हत्या के प्रयास या गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के लिए लूट या डकैती) के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) सचिन सांगवान, ऑटो चालक सलामत खान को चाकू मारने और उसे लूटने के आरोपी सुधाकर के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। सुधाकर पर ऑटो चालक पर चार मार्च, 2016 को ओखला में चाकू मारने का आरोप था।
न्यायाधीश ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि पीड़ित को "घातक चोट लगना या उसकी मृत्यु होना निश्चित" था। न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह स्थापित कानूनी स्थिति है कि ऐसे मामले में जब किसी स्थिति की दो व्याख्याएं संभव होती हैं, अदालत आरोपी के पक्ष में व्याख्या करेगी।’’
एएसजे सांगवान ने एक हालिया फैसले में कहा, ‘‘तदनुसार, अदालत का मानना है कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 के तहत मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं होता।’’
उन्होंने कहा कि आरोपी का मकसद हिंसा करके लूट करना था, लेकिन ऐसा कोई शब्द नहीं बोला गया था जिससे पीड़ित की हत्या करने का इरादा स्पष्ट हो तथा मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के अनुसार, पीड़ित पर चाकू से केवल एक वार किया गया था, जो गंभीर नहीं था।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मौजूदा परिस्थितियों में, यह संदेहास्पद है कि क्या आरोपी का इरादा पीड़ित की जान लेने का था।’’
अदालत ने हालांकि, सुधाकर को आईपीसी की धारा 394 और 397 के तहत अपराध का दोषी ठहराया।
अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी सुधाकर को आईपीसी की धारा 394, 397 और 34 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है। हालांकि, आरोपी अरुण को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है।’’
ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर सुधाकर और अरुण के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को करना तय किया, जब सजा पर दलीलें सुनी जाएंगी।
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