देश की खबरें | सिंगापुर के पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए उल्टी गिनती शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पीएसएलवी रॉकेट के जरिये सिंगापुर के पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रह और छह अन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए शनिवार को उल्टी गिनती शुरू हो गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी।

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 29 जुलाई पीएसएलवी रॉकेट के जरिये सिंगापुर के पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रह और छह अन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए शनिवार को उल्टी गिनती शुरू हो गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी।

इस महीने बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-3 को प्रक्षेपित करने के बाद इसरो अब पीएसएलवी-सी56 को प्रक्षेपित करने की अंतिम तैयारी कर रहा है, जिसके जरिये सिंगापुर के रडार मानचित्रण पृथ्वी प्रेक्षण उपग्रह डीएस-एसएआर उपग्रह और छह अन्य उपग्रहों को 30 जुलाई को प्रक्षेपित करेगा।

चेन्नई से करीब 135 किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से रविवार सुबह छह बजकर 30 मिनट पर 44.4 मीटर लंबा ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) रवाना होगा।

पीएसएलवी-सी56 इसरो की वाणिज्यिक इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का एक समर्पित मिशन है।

इस साल अप्रैल में पीएसएलवी-सी55/टीलियोस-2 के सफल मिशन के बाद सिंगापुर के उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी रविवार को मिशन को अंजाम देने जा रही है।

इसरो ने शनिवार को कहा, ‘‘पीएसएलवी-सी56/डीएस-एसएआर मिशन को 30 जुलाई, 2023 को सुबह 6.30 बजे प्रक्षेपित करने के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है।’’

अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि 360 किलोग्राम वजन वाला डीएस-एसएआर उपग्रह डीएसटीए (सिंगापुर सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला) और एसटी इंजीनियरिंग, सिंगापुर के बीच साझेदारी के तहत विकसित किया गया है। इसने कहा कि प्रक्षेपण के बाद इस उपग्रह का उपयोग सिंगापुर सरकार की विभिन्न एजेंसियों की उपग्रह चित्रण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाएगा।

इसरो ने कहा कि उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित करने की क्षमता के लिए उसका विश्वसनीय रॉकेट पीएसएलवी रविवार के मिशन में 58वीं उड़ान और ‘कोर अलोन कॉन्फ़िगरेशन’ के साथ 17वीं उड़ान को अंजाम देगा।

अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक ‘कोर अलोन कॉन्फ़िगरेशन’ रॉकेट का अभिप्राय ऐसे रॉकेट से होता है जो ठोस ‘स्ट्रैप ऑन मोटर’ का इस्तेमाल पहले चरण में नहीं करता, जैसा कि इससे अन्य संस्करण पीएसएलवी-एक्सएल, क्यूएल और डीएल करते हैं, जो क्रमश: छह, चार या दो बूस्टर का इस्तेमाल करते हैं।

इसरो ने बताया कि पीएसएलवी को ‘इसरो का वर्कहॉर्स’ का तमगा प्राप्त है, जो लगातार उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर रहा है। एजेंसी ने कहा कि कल का मिशन पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने का गवाह बनेगा।

डीएस-एसएआर में इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) लगाया गया है। यह उपग्रह को सभी मौसमों में दिन और रात तस्वीर लेने में सक्षम बनाता है।

अन्य उपग्रहों में वेलोक्स-एएम 23 किलोग्राम का सूक्ष्म उपग्रह, एआरसीएडीई (एटमॉस्फेरिक कपलिंग और डायनेमिक्स एक्सप्लोरर), प्रायोगिक उपग्रह स्कूब-2, 3यू नैनोसैटेलाइट, गैलासिया-2, ओआरबी-12 स्ट्राइडर शामिल हैं।

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