जरुरी जानकारी | बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 379 परियोजनाओं की लागत 4.64 लाख करोड़ रुपये बढ़ी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 379 परियोजनाओं की लागत अप्रैल, 2023 तक तय अनुमान से 4.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी और अन्य कारणों से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।

नयी दिल्ली, 28 अगस्त बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 379 परियोजनाओं की लागत अप्रैल, 2023 तक तय अनुमान से 4.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी और अन्य कारणों से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है।

मंत्रालय की अप्रैल, 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की 1,605 परियोजनाओं में से 379 की लागत बढ़ गई है, जबकि 800 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इन 1,605 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत 22,85,674.25 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब इसके बढ़कर 27,50,591.38 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि इन परियोजनाओं की लागत 20.34 प्रतिशत यानी 4,64,917.13 करोड़ रुपये बढ़ गई है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल, 2023 तक इन परियोजनाओं पर 14,13,592.88 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कुल अनुमानित लागत का 51.39 प्रतिशत है।

हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि यदि परियोजनाओं के पूरा होने की हालिया समयसीमा के हिसाब से देखें तो देरी से चल रही परियोजनाओं की संख्या कम होकर 598 पर आ जाएगी।

वैसे इस रिपोर्ट में 413 परियोजनाओं के चालू होने के साल के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी से चल रही 800 परियोजनाओं में से 194 परियोजनाएं एक महीने से 12 महीने, 175 परियोजनाएं 13 से 24 महीने की, 306 परियोजनाएं 25 से 60 महीने और 125 परियोजनाएं 60 महीने या अधिक की देरी से चल रही हैं।

इन 800 परियोजनाओं में हो रहे विलंब का औसत 37.07 महीने है।

इन परियोजनाओं में देरी के कारणों में भूमि अधिग्रहण में विलंब, पर्यावरण और वन विभाग की मंजूरियां मिलने में देरी और बुनियादी संरचना की कमी प्रमुख है।

इनके अलावा परियोजना का वित्तपोषण, विस्तृत अभियांत्रिकी को मूर्त रूप दिये जाने में विलंब, परियोजना की संभावनाओं में बदलाव, निविदा प्रक्रिया में देरी, ठेके देने व उपकरण मंगाने में देरी, कानूनी व अन्य दिक्कतें, अप्रत्याशित भू-परिवर्तन आदि की वजह से भी इन परियोजनाओं में विलंब हुआ है।

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