कोरोना वायरस ने अदालतों को कैसे काम करें सोचने पर मजबूर किया : सीजेआई
उच्चतम न्यायालय के ई-फाइलिंग मॉड्यूल के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट की पूरी प्रक्रिया की दिशा में यह प्रणाली एक छोटा सा कदम है और इसने रजिस्ट्री को वकीलों के चैंबर तक पहुंचा दिया है।
नयी दिल्ली, 15 मई प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एस ए बोब्डे ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने अदालतों को यह सोचने पर मजबूर किया कि कैसे काम करना है और काम करने के एक नए महौल की तैयारी के लिये एक अनिवार्य प्रशिक्षण भी मुहैया कराया।
उच्चतम न्यायालय के ई-फाइलिंग मॉड्यूल के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि ई-कोर्ट की पूरी प्रक्रिया की दिशा में यह प्रणाली एक छोटा सा कदम है और इसने रजिस्ट्री को वकीलों के चैंबर तक पहुंचा दिया है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “महामारी ने हमें फिर से यह विचार करने पर बाध्य किया कि काम कैसे करना है और न्यायिक प्रक्रिया में क्या आवश्यक है। असली चुनौती मार्च में आई और मुझे खुशी है कि उच्चतम न्यायालय उन पहले कुछ संस्थानों में शामिल था जिन्होंने घोषणा की कि वह अब समान्य रूप से नहीं खुलेगा और सीमित तरीके से काम करेगा।”
न्यायमूर्ति बोब्डे ने कहा, “इस अवधि ने नये कामकाजी माहौल के लिये आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करा दिया। अब पीछे मुड़कर देखने का सवाल ही नहीं। अदालती कार्यवाहियों को देखने का नजरिया हमें बदलनी होगी। हम यह मॉड्यूल शुरू कर रहे है जिसमें विधिज्ञ परिषद द्वारा सुझाव और उनके लिये सुझाव के विकल्प खुले हैं।”
उन्होंने कहा कि समान्य कामकाज को सीमित कर इस संकट में प्रतिक्रिया देने वाले शुरुआती संस्थानों में से उच्चतम न्यायालय एक था और वह यह सुनिश्चित करने के लिये दृढ़ था कि अदालत कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार का केंद्र न बन जाए।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमनें पाया कि वकीलों और रजिस्ट्री के सदस्यों की हिफाजत और उनकी जिंदगी की सुरक्षा उन परिस्थितियों में संभव नहीं थी क्योंकि हर जगह चाहे वह आवेदन काउंटर हो, वकीलों का कक्ष हो, आदेश की प्रति प्राप्त करने का कक्ष हो या कैंटीन सब जगह लोगों की भीड़ थी। यह पाया गया कि शीर्ष अदालत परिसर में लोगों की भीड़ कम करने के लिये संयुक्त रूप से काम करने की नितांत आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा, “यह बदलाव आसान नहीं था और समयबद्ध रूप से काम करने के तौर-तरीकों से विचलन मुश्किल था। यह काम करने की पुरानी और नई शैली के बीच की जद्दोजहद थी।”
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ई-फाइलिंग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कृत्रिम मेधा की एक प्रणाली का आधार है और यह प्रणाली 10 लाख शब्द प्रति मिनट की गति से जानकारी निकालने में भी सक्षम है।
न्यायमूर्ति बोब्डे ने कहा, “ई-फाइलिंग की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी…अगर अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान हमारे पास यह सुविधा होती तो हम काफी तेज गति से आगे बढ़ सकते थे क्योंकि हजारों पन्ने फाइल किये जा रहे थे। लॉकडाउन के दौरान 820 मामले और 552 दस्तावेज ई-फाइलिंग के जरिये दायर किये गए…।”
न्यायमूर्ति बोब्डे ने आगे कहा कि तकनीक इस्तेमाल में सरल होनी चाहिए और नागरिकों को कहीं भी बाहर रखने वाली नहीं होनी चाहिए। ई-फाइलिंग की यह व्यवस्था न्याय तक लोगों की पहुंच को सरल और कम खर्चीली होने से समावेषी बनाएगी।
इस मौके पर न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी मौजूद थे और उन्होंने कहा कि महामारी ने लोगों के दैनिक जीवनको प्रभावित किया है और इससे निपटने के लिये उचित संस्थागत प्रक्रिया की जरूरत है।
इस दौरान उच्चतम नयायालय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष दुष्यंत दवे भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि ई-फाइलिंग मौजूदा महामारी के दौर में शीर्ष अदालत और खासतौर पर वकीलों के लिये जीवन रेखा है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 10:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

