फूल वालों की जिंदगी में कोरोना ने बोए कांटे
कोरोना वायरस संक्रमण से उपजे संकट ने फूलों की खेती और कारोबार करने वाले हजारों हजार किसानों, मालियों व फूल वालों की जिंदगी से मानों खुश्बू छीन ली है।
जयपुर, 24 मई जयपुर की जनता मार्केट में राजस्थान की सबसे पुरानी व बड़ी फूल मंडी पूरे दो महीने से बंद हैं। निषिद्ध क्षेत्र में होने के कारण इसके जल्द खुलने की संभावना भी नहीं है। लॉकडाउन के कारण कमोबेश यही हालत राज्य की प्रमुख फूल मंडियों की है।
कोरोना वायरस संक्रमण से उपजे संकट ने फूलों की खेती और कारोबार करने वाले हजारों हजार किसानों, मालियों व फूल वालों की जिंदगी से मानों खुश्बू छीन ली है।
दो महीने के लॉकडाउन में फूलों का कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। राजधानी जयपुर में जहां औसतन 25 से 30 टन फूलों की खपत होती है वहां कुछ क्विंटल फूल भी नहीं बिक रहे।
राजस्थान दुकानदार महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष किशोर कुमार टाक कहते हैं,‘‘ फूलों के कारोबार को तो मानों कोरोना का ग्रहण लग गया। चाहे किसान हो, माली या फूल विक्रेता सबकी फांके की नौबत है। लगभग दो महीने तो मंडियां ही बंद रहीं.. अब जब कुछ खुलनी शुरू हुई हैं तो खरीददार नहीं हैं। फूल कारोबार ऐतिहासिक संकट झेल रहा है।’’
उल्लेखनीय है कि जयपुर की सबसे बड़ी फूल मंडी लगभग तीन दशक से यहां जनता मार्केट में लगती है। परकोटे में स्थित यह इलाका निषिद्ध क्षेत्र है यानी कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पाट। दो महीने से पूरी तरह बंद है। आगे भी इसके जल्द खुलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती। वहीं मुहाना की नयी मंडी में इसी हफ्ते थोड़ा बहुत कारोबार शुरू हुआ है।
जानकारों के अनुसार केवल जयपुर शहर में ही फूलों की छोटी मोटी छह सौ दुकानें हैं। शहर में कोरोना काल से पहले एक दिन में 25 से 30 टन तो त्योहारी व शादी ब्याह के सीजन में 50 टन तक फूल खपत होती है। शहर में बिकने वाले प्रमुख फूलों में गुलाब के अलावा गेंदा और मोगरा है।
जयपुर शहर मंदिरों की नगरी है इसलिए इसे छोटी काशी कहा जाता है। शहर में सजावट के अलावा फूलों की प्रमुख खपत मंदिरों में होती है। एक अन्य कारोबारी के अनुसार जनता मार्केट में आम दिनों में लगभग 15 लाख रुपये का कारोबार होता था जो नवरात्रों जैसे त्योहारी सीजन या आखा तीज जैसे दिनों में तो 35 से 50 लाख रुपये तक प्रतिदिन हो जाता था। अब तो कारोबार खत्म ही हो चला है।
जयपुर पुष्प विक्रेता आढ़तिया संघ के अध्यक्ष छुट्टन लाल सैनी ने ‘पीटीआई ’ से कहा कि फूल कारोबार जैसा कुछ रहा ही नहीं। कहां तो हर दिन टनों फूल बिकते थे और कहां अब केवल मुहाना मंडी में सब्जियों के साथ थोड़े बहुत फूल आते हैं। इससे हजारों हजार मालियों, किसानों और फूल विक्रेताओं की आजीविका संकट में है।
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