कोरोना प्रभाव: बार्कलेज ने कहा, 2020-21 में 20 अरब डॉलर चालू खाते का अधिशेष होने का अनुमान

देश का चालू खाता प्राय: घाटे में बना रहता है। पिछली बार देश में चालू घाटे के अधिशेष की स्थिति 2006-07 की पहली तिमाही में थी। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बार्कलेज ने मंगलवार को एक विश्लेषण में कहा कि उस समय भी कारण कच्चे तेल का सस्ता होना था।

जमात

मुंबई, 19 मई कोरोना संकट के बीच आयात में लगातार गिरावट से चालू वित्त वर्ष में भारत के पास चालू खाते में 20 अरब डॉलर या जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 0.7 प्रतिशत अधिशेष हो सकता है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

देश का चालू खाता प्राय: घाटे में बना रहता है। पिछली बार देश में चालू घाटे के अधिशेष की स्थिति 2006-07 की पहली तिमाही में थी। विदेशी ब्रोकरेज कंपनी बार्कलेज ने मंगलवार को एक विश्लेषण में कहा कि उस समय भी कारण कच्चे तेल का सस्ता होना था।

वास्तव में आर्थिक वृद्धि की बिगड़ती रफ्तार के साथ निर्यात-आयात व्यापार 2019 से संतुलित हो रहा था।

देश भर में 25 मार्च से ‘लॉकडाउन’ (बंद) के बाद से निर्यात और और आयात दोनों अप्रैल में अबतक के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गये।

रिपोर्ट के अनुसार बंदरगाहों के लगभग पूर्ण रूप से बंद होने के कारण अप्रैल महीने में जहां निर्यात 60 प्रतिशत घटा वहीं आयात में 59 प्रतिशत की गिरावट आयी। इसके कारण अप्रैल में व्यापार घाटा चार साल में सबसे कम रहा।

बार्कलेज के अनुसार, ‘‘हमारा अनुमान है कि व्यापार घाटा नीचे बना रहेगा और 2020-21 में यह 103 अरब डॉलर या जीडीपी का 3.7 प्रतिशत रह सकता है। वहीं 2019-20 में व्यापार घाटा देश के जीडीपी का 5.3 प्रतिशत था।

वास्तव में अर्थव्यवस्था की सुस्ती से निर्यात के साथ आयात भी नीचे आ रहा है। इससे 2018-19 की पहली छमाही से बाह्य मोर्चे पर स्थिति बेहतर हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में व्यापार घाटा 28 अरब डॉलर जबकि 2017-18 में 66 अरब666666666666666666666 डॉलर था।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘हमारे संकेतकों के अनुसार चालू खाते का घाटा पहली तिमाही में 3 अरब डॉलर रह सकता है। उसके बाद ‘अवांछनीय’ रूप से अधिशेष की स्थिति देखने को मिलेगी जो कमजोर आर्थिक गतिविधियों को प्रतिबिंबित करेगा। इसको देखते हुए हमने चालू खाते के घाटे के मोर्चे पर अधिशेष की स्थिति काा अनुमान जताया है और 2020-21 में 19.6 अरब डॉल या जीडीपी का 0.7 प्रतिशत रह सकता है। यह पूर्व के 10 अरब डॉलर के अनुमान से लगभग दोगुना है।

बार्कलेज ने 2020-21 की दूसरी तिमाही में 8 अरब डॉलर के चालू खाते में 8 अरब डॉलर के अधिशेष का अनुमान जताया है। अगर ऐसा रहता है तो यह वित्त वर्ष 2006-07 के बाद पहली बार होगा।

इसे आवंछनीय अधिशेष कहे जाने के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिशेष का कारण कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये पूरी तरह ‘लॉकडाउन’ और कच्चे तेल के दाम में नरमी है। इसका कारण निर्यात से अत्यधिक आय का होना नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल के दाम में नरमी अर्थव्यवस्था के लिये अनुकूल है लेकिन चालू खाता संतुलन पर बड़ा प्रभाव तेल एवं गैर-तेल अयात दोनों के लिये मांग में नरमी का होना है।

बार्कलेज ने कहा कि लेकिन इसमें से कुछ लाभ महामारी के कारण सेवा निर्यात पर प्रतिकूल असर होने से प्रभावित होगा। इसका कारण अमेरिका और पश्चिम एशिया में कोरोना संकट के कारण स्थिति का खराब होना है। इसके अलावा बाहर से जो पैसा भेजा जाता है, वह भी प्रभावित होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा कि मार्च से जो बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी हो रही है, वह 2020-21 की दूसरी तिमाही में स्थिर हो सकती है लेकिन इससे पूंजी खाते के अधिशेष पर हल्का प्रभाव पड़ेगा।

बार्कलेज ने कहा, ‘‘लेकिन हम इसके बाद भी 2020-21 में करीब 38 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन अधिशेष की अपेक्षा कर रहे हैं।’’

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