विदेश की खबरें | नेवाडा में लीथियम की खदानों पर विवाद, अदालत में बृहस्पतिवार से सुनवाई बहाल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. यूएस डिस्ट्रिक्ट जज मिरांडा ड्यू ने अस्थायी रोक लगाने की आदिवासी नेताओं की मांगों को पिछले साल दो बार खारिज किया। नेताओं का कहना है कि खदान स्थल पवित्र भूमि है जहां 1865 में अमेरिकी सेना ने उनके पूर्वजों का नरसंहार किया था।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज मिरांडा ड्यू ने अस्थायी रोक लगाने की आदिवासी नेताओं की मांगों को पिछले साल दो बार खारिज किया। नेताओं का कहना है कि खदान स्थल पवित्र भूमि है जहां 1865 में अमेरिकी सेना ने उनके पूर्वजों का नरसंहार किया था।

बृहस्पतिवार को हो रही सुनवाई काफी महत्वपूर्ण है और यह इस मामले के भविष्य की पृष्ठभूमि तय करेगी। इससे पहले मामले में तब नया मोड़ आया था जब नौवीं यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील ने एरिजोना के आदेश को कायम रखा था, जिसमें तांबे की खदान को मिली सरकार की स्वीकृति को रद्द कर दिया गया था। उस फैसले ने 1872 के खनन कानून पर सवाल खड़े कर दिए थे।

लीथियम नेवाडा कॉर्पोरेशन और यूएस ब्यूरो ऑफ लैंड मैनेजेंट का कहना है कि एक प्राचीन ज्वालामुखी पर स्थित यह परियोजना इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने के लिए लीथियम की बढ़ती मांगों को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति जो बाइडन की योजना जीवाश्म ईधन की जगह जल्द से जल्द अक्षय ऊर्जा को उपयोग में लाने की है।

नेवाडा के किसान और संरक्षणवादी संगठनों का कहना है कि यह परियोजना कुछ पक्षियों.... सेज ग्राउस, लाहंटन कटथ्रॉट ट्रौट, प्रोंगोर्न एंटीलोप और गोल्डन ईगल के घटते आवासों को खत्म कर देगी।

बीएलएम ने परियोजना को 2021 में ट्रंप प्रशासन के आखिरी दिनों में मंजूरी दिए जाने पर तेजी से सुनवाई की थी। बाइडन प्रशासन खदान को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रपति के स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा के तौर पर लगातार समर्थन देता रहा है।

लीथियम की मांग 2030 में 2020 की तुलना में तीन गुना बढ़ने की संभावना है और लीथियम नेवाडा का कहना है कि सिर्फ उसकी परियोजना ही इस मांग को पूरा कर सकती है।

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