देश की खबरें | उपभोक्ता अदालत ने अधूरे विला का कब्जा देने को लेकर बिल्डर पर लगाया जुर्माना

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नयी दिल्ली, छह नवंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने एक अपूर्ण विला के कब्जे की पेशकश के लिए बेंगलुरु स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी पर जुर्माना लगाया है और उसे अपने खरीदारों को पूरी राशि वापस करने का निर्देश दिया है।

शिकायतकर्ताओं ने 2013 में चेन्नई में 3,900 वर्ग फुट का विला बुक किया था और 2015 तक कब्जा देने का वादा किया गया था। 2017 में, दो साल की देरी के बाद, खरीदारों को विला का कब्जा लेने के लिए बुलाया गया था लेकिन तब भी उपभोक्ताओं के मुताबिक विला रहने लायक स्थिति में नहीं थी।

पीठासीन सदस्य सी विश्वनाथ और सदस्य राम सूरत मौर्य की पीठ ने कहा कि बिल्डर ने जोर देकर कहा कि शिकायतकर्ता एक कागज पर हस्ताक्षर करें कि वे पूरी तरह से तैयार स्थिति में विला का कब्जा प्राप्त कर रहे हैं।

पीठ ने 29 अक्टूबर को एक आदेश में कहा, “यह एक अनुचित व्यापार प्रथा थी। अधूरे निर्माण पर कब्जा देने और “समापन प्रमाणपत्र” प्राप्त किए बिना बिल्डर के कार्य को उचित नहीं ठहराता।”

आयोग ने आदेश दिया: “शिकायत को एक लाख रुपये के जुर्माने के साथ अनुमति दी जाती है। बिल्डर को दो महीने के अंदर प्रत्येक जमा की तारीख से नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ शिकायतकर्ताओं द्वारा जमा की गई पूरी राशि वापस करने का निर्देश दिया जाता है।”

शिकायतकर्ताओं ने आयोग में याचिका दायर कर रियल एस्टेट कंपनी को 3,53,68,359 रुपये और प्रत्येक जमा राशि के भुगतान की तारीख से 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक पीड़ा व प्रताड़ना के लिए 10 लाख रुपये तथा मुकदमे की लागत के तौर पर एक लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की थी।

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