देश की खबरें | सलाखों के पीछे भी कैदियों के संवैधानिक अधिकार बरकरार रहते हैं: उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि सलाखों के पीछे भी एक कैदी के मूल संवैधानिक अधिकार बरकरार रहते हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने तिहाड़ जेल में रहने की स्थिति का ‘‘गहनता’’ से निरीक्षण करने के लिए वकीलों की चार सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है।

नयी दिल्ली, 29 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि सलाखों के पीछे भी एक कैदी के मूल संवैधानिक अधिकार बरकरार रहते हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने तिहाड़ जेल में रहने की स्थिति का ‘‘गहनता’’ से निरीक्षण करने के लिए वकीलों की चार सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है।

समिति जेल परिसर में पेयजल, स्वच्छता और शौचालयों के रखरखाव की स्थिति का निरीक्षण करेगी।

दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर में बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी पर गौर करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति की कैद की स्थिति के बावजूद, जीने के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने 23 अगस्त को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘इस मुद्दे की गंभीर प्रकृति को समझते हुए, हम तिहाड़ जेल का पूरी गहनता से निरीक्षण करने के लिए एक स्वतंत्र समिति को अधिकृत करना आवश्यक समझते हैं। इस उद्देश्य के लिए, हम एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन करते हैं जिसमें डॉ. अमित जॉर्ज, संतोष कुमार त्रिपाठी, नंदिता राव और तुषार सन्नू शामिल हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘उनका कार्य वर्तमान स्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना और परिसर में पीने के पानी, स्वच्छता और शौचालयों के रखरखाव की स्थिति के संबंध में हमें जानकारी देना है।’’

उच्च न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायालय कानूनी सेवा समिति (डीएचसीएलएससी) द्वारा दाखिल एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें तिहाड़ जेल परिसर में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और स्वच्छता स्थितियों को बनाए रखने के महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डाला गया था।

पीठ ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया था कि जीने का अधिकार मानवाधिकारों में सर्वोपरि है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित (जीने के) मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता, चाहे कोई भी व्यक्ति जेल में ही क्यों न हो। एक कैदी के बुनियादी संवैधानिक अधिकार सलाखों के पीछे भी कायम रहते हैं।’’

उच्च न्यायालय ने तिहाड़ जेल के महानिदेशक (कारागार) से जेल परिसर के गहन निरीक्षण के लिए सभी आवश्यक संसाधन और सहायता प्रदान करके समिति के काम को सुविधाजनक बनाने को भी कहा।

पीठ ने कहा कि समिति और दिल्ली सरकार दोनों की ओर से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट सुनवाई की अगली तारीख 18 अक्टूबर से पहले दाखिल की जाये।

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