देश की खबरें | केरल को निपाह से निपटने के लिए भेजी गई ‘एंटीवायरल’ की खेप और सचल प्रयोगशाला
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के कोझिकोड जिले में निपाह के प्रकोप के मद्देनजर आईसीएमआर ने इससे निपटने के लिए राज्य के आग्रह पर ‘एंटीबॉडी’ उपलब्ध करा दी है। राज्य को संदिग्ध संक्रमितों के नमूनों की जांच के लिए एक सचल प्रयोगशाला भी भेजी गई है।
तिरुवनंतपुरम/नयी दिल्ली, 14 सितंबर केरल के कोझिकोड जिले में निपाह के प्रकोप के मद्देनजर आईसीएमआर ने इससे निपटने के लिए राज्य के आग्रह पर ‘एंटीबॉडी’ उपलब्ध करा दी है। राज्य को संदिग्ध संक्रमितों के नमूनों की जांच के लिए एक सचल प्रयोगशाला भी भेजी गई है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बृहस्पतिवार को कोझिकोड में ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ की आपूर्ति की। वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज करने के लिए एंटीवायरल ही सरकार के पास उपलब्ध एकमात्र विकल्प है, हालांकि इसकी प्रभावकारिता अभी तक चिकित्सकीय रूप से सिद्ध नहीं हुई है।
आईसीएमआर के पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान ने निपाह वायरस के संदिग्ध संक्रमितों की समय से जांच के लिए बृहस्पतिवार को अपनी सचल बीएसएल-3 (बायोसेफ्टी लेवल-3) प्रयोगशाला केरल के कोझिकोड भेजी।
संस्थान ने यह कदम कोझिकोड में निपाह वायरस से संक्रमण के पांच मामलों की पुष्टि होने के बाद उठाया है। पांच मरीजों में से दो की मौत हो चुकी है।
केंद्र ने स्थिति का जायजा लेने और निपाह संक्रमण के प्रबंधन में राज्य सरकार की मदद करने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान (एनआईएमएचएएनएस) के विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय केंद्रीय टीम को केरल भेजा है।
माना जा रहा है कि निपाह वायरस की मौजूदगी की जांच के लिए चमगादड़ों से नमूने एकत्र किए जाएंगे।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि एंटीवायरल का इलाज में इस्तेमाल पर केंद्रीय विशेषज्ञ समिति के साथ चर्चा की गई। उन्होंने कहा, ‘‘आगे के कदम या कार्रवाई का फैसला विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा।’’
उन्होंने राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच परामर्श का हवाला दिया।
मंत्री ने कहा, ‘‘आईसीएमआर की एमबीएसएल-3 प्रयोगशाला जैविक संक्रमण से तृतीय स्तर की सुरक्षा वाली दक्षिण एशिया की पहली प्रयोगशाला है और इसे कोझिकोड में तैनात किया गया है। इससे जिले में संक्रमण का समय से पता लगाने में मदद मिलेगी।’’
अधिकारियों ने बताया कि अभी तक नमूनों को पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु रोग संस्थान में जांच के लिए भेजा जाता था।
इस सचल प्रयोगशाला की स्थापना पिछले साल फरवरी में नए और बार-बार सामने आने वाले विषाणु संक्रमण की जांच करने के लिए की गई थी।
इसके अलावा, राजीव गांधी जैवविज्ञान केंद्र (आरजीसीबी) की एक पूरी तरह से सुसज्जित सचल विषाणु विज्ञान जांच प्रयोगशाला को वायरस की जांच और पहचान करने के लिए केरल के इस उत्तरी जिले में भेजा गया है।
यह चौथी बार है जब राज्य में इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई है। 2018 और 2021 में कोझिकोड में और 2019 में एर्नाकुलम में भी इस वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
एम102.4 मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, एक प्रायोगिक दवा है जिसे कोझिकोड में 2018 निपाह प्रकोप के दौरान संक्रमित रोगियों के इलाज के लिए आयात किया गया था। तब इसका उपयोग नहीं किया गया क्योंकि दवा की आपूर्ति होने तक निपाह वायरस का प्रकोप समाप्त हो गया था।
इसके उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया और प्रोटोकॉल उस समय आईसीएमआर के सहयोग से तैयार किए गए थे।
जॉर्ज ने निपाह रोकथाम प्रयासों में मदद के लिए आरजीसीबी की सराहना की और कहा कि अब और अधिक नमूनों का परीक्षण किया जा सकता है।
आरजीसीबी के निदेशक प्रोफेसर चंद्रभास नारायण ने कहा कि सचल प्रयोगशाला में छह विशेषज्ञ अपनी सेवाएं देंगे। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में नमूनों की जांच के छह घंटे के भीतर परिणाम आ जाएंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने निपाह प्रकोप की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की और तैयारियों का जायजा लेने के लिए एनआईवी, पुणे का दौरा किया।
कोझिकोड जिला प्रशासन ने बृहस्पतिवार, शुक्रवार के अलावा शनिवार (16 सितंबर) को भी कोझिकोड के शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी है।
जॉर्ज ने राज्य विधानसभा में कहा कि कोझिकोड में निपाह के प्रकोप के बारे में चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन लोगों को अपनी दैनिक गतिविधियों के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है।
उन्होंने विधानसभा में दिए एक बयान में कहा, ''घबराने की बिलकुल जरूरत नहीं है। हम सब साथ मिलकर सावधानी से इस समस्या का सामना कर सकते हैं।''
दिमाग को नुकसान पहुंचाने वाले इस वायरस से कोझिकोड जिले में दो लोगों की मौत हुई है और तीन अन्य संक्रमित हैं।
बुधवार को 24 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी के निपाह वायरस से संक्रमित होने के बाद केरल में इस बीमारी का पांचवां मामला सामने आया था।
तीनों संक्रमित व्यक्तियों का इलाज किया जा रहा है, जिनमें से नौ साल के एक बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। सरकार ने आईसीएमआर को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का ऑर्डर दिया है।
निपाह वायरस के लिए यही एकमात्र एंटी-वायरल उपचार है, हालांकि इसे अभी नैदानिक मंजूरी नहीं मिली है।
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