नयी दिल्ली, छह नवंबर कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि 'रथ प्रभारी' वाले मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बाद सरकार ने चुनावी राज्यों में अपनी इस पहल को भले ही रोक दिया हो, लेकिन अन्य प्रदेशों में राजनीतिक प्रचार में अधिकारियों के ‘इस्तेमाल का खतरनाक चलन’ जारी है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस इस चलन को रोकने के लिए सभी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "यह स्वागत योग्य है कि निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की शिकायत पर कार्रवाई की है और मोदी सरकार को चुनाव वाले राज्यों में वरिष्ठ नौकरशाहों को "रथप्रभारी" के रूप में भेजने के फैसले को वापस लेने पर मजबूर किया है। लेकिन अधिकारियों के जबरदस्त इस्तेमाल का बड़ा मुद्दा मूलतः एक व्यक्ति के निजी राजनीतिक प्रचार को लागू करने का कार्यक्रम बना हुआ है।"
उन्होंने आरोप लगाया, "अब यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री लोक सेवकों और सैनिकों को राजनीति से दूर रखने के लिए 22 अक्टूबर को लिखे गए खरगे जी (मल्लिकार्जुन खरगे) के पत्र पर ध्यान देने के मूड में नहीं हैं।"
रमेश ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने वाली और खतरे में डालने वाली इस पूरी तरह से अस्वीकार्य और खतरनाक प्रथा को खत्म करने के लिए सभी विकल्प अपनाएगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गत 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि अधिकारियों को सरकार की पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियों का ‘‘प्रचार’’ करने का हालिया आदेश ‘‘नौकरशाही का राजनीतिकरण’’ है और उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की थी।
अपने पत्र में खरगे ने 18 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश पर आपत्ति जताई थी और दावा किया था कि आदेश में संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव जैसे उच्च रैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को देश के सभी 765 जिलों में ‘‘रथ प्रभारी’’ के रूप में तैनात किया जाना है, जो ‘‘भारत सरकार की पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियों का प्रचार करेंगे।’’
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