देश की खबरें | कांग्रेस ने बीडीए को जमीन सौंपने को लेकर भाजपा नेता अशोक पर निशाना साधा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने बुधवार को विपक्ष के नेता आर. अशोक की आलोचना की, जिन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनकी पत्नी पर एमयूडीए घोटाले के सिलसिले में 14 भूखंडों का स्वामित्व और कब्जा छोड़ने के लिए निशाना साधा था।
बेंगलुरु, दो अक्टूबर कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने बुधवार को विपक्ष के नेता आर. अशोक की आलोचना की, जिन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनकी पत्नी पर एमयूडीए घोटाले के सिलसिले में 14 भूखंडों का स्वामित्व और कब्जा छोड़ने के लिए निशाना साधा था।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती बी.एम. द्वारा भूखंड लौटाने की पेशकश के बाद मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) ने मंगलवार को उनको आवंटित 14 भूखंडों को वापस लेने का फैसला किया था।
मंत्री जी परमेश्वर, एच. के. पाटिल, कृष्णा बायरे गौड़ा और सतीश जारकीहोली ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और यहां लोट्टेगोल्लाहल्ली में लगभग एक एकड़ उस भूमि की कथित अवैध अधिसूचना रद्द करने के संबंध में दस्तावेज जारी किए, जो अशोक के पास थी और बाद में उन्होंने इसे ‘उपहार’ के रूप में बेंगलुरू विकास प्राधिकरण (बीडीए) को ‘वापस’ कर दिया था।
उन्होंने राज्य की जनता की ओर से अशोक से जवाब मांगा कि उन्होंने अधिसूचित भूमि को अपने नाम पर कैसे पंजीकृत किया और फिर इसे मूल मालिक - बीडीए से कैसे गैर अधिसूचित करवाया और बाद में जब मामला अदालत में चला गया तो उन्होंने इसे बीडीए को क्यों लौटा दिया?
परमेश्वर ने भाजपा नेता के बारे में कहा, ‘‘विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा 14 भूखंडों को वापस करने के संबंध में कई सवाल उठाए हैं और कहा है कि ऐसा करके मुख्यमंत्री ने घोटाले को स्वीकार कर लिया है। लेकिन हम आपके सामने यह कहने आए हैं कि एक ऐसा मामला है जिसमें अशोक स्वयं भी इसी तरह के मामले में शामिल हैं।’’
उन्होंने सवाल उठाया कि जब भूमि का स्वामित्व बीडीए के पास था, तो अशोक किसी से भूमि कैसे खरीद सकते थे और फिर एक ‘‘असंबद्ध व्यक्ति’’ के माध्यम से इसे कैसे गैर अधिसूचित करा सकते थे।’’ उन्होंने कहा कि इसके बाद एक सेवानिवृत्त विंग कमांडर ने भूमि के संबंध में लोकायुक्त और फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद अशोक ने 27 अगस्त, 2011 को बीडीए को जमीन लौटाने का फैसला किया, जो इसका वास्तविक मालिक है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भूमि वापस कर दी गई है, इसका मतलब है कि मामला खत्म हो गया है इसलिए आपराधिक जांच की कोई जरूरत नहीं है।’’
गृह मंत्री ने अशोक से पूछा कि वह सिद्धरमैया और उनकी पत्नी के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग कैसे कर रहे हैं तथा उनकी पत्नी द्वारा 14 भूखंडों को एमयूडीए को वापस करने पर आपत्ति कैसे उठा रहे हैं जबकि उन्होंने खुद ऐसा करके अदालती आदेश से राहत पायी थी।
यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस सरकार अशोक के मामले पर इतने लंबे समय तक चुप क्यों रही और इस मामले को तभी उठाया जब सिद्धरमैया के खिलाफ आरोप सामने आए, परमेश्वर ने कहा कि विगत में जब कांग्रेस सत्ता में थी तो यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार मामले को आगे बढ़ाने का फैसला करती है तो कानूनी टीम इस बात की जांच करेगी कि आगे कैसे बढ़ना है। उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (अशोक को) इस्तीफा देने दीजिए, फिर उनके (भाजपा) पास सिद्धरमैया से इस्तीफा मांगने का अधिकार होगा।’’
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