देश की खबरें | संरक्षित वन पर शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ पथनमथिट्टा में कांग्रेस की हड़ताल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के पथनमथिट्टा जिले की सात पंचायतों में मंगलवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित एक दिवसीय हड़ताल के कारण दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर वाहन नहीं दिखे। संरक्षित वन के पास पर्यावरण के लिहाज से संवदेनशील क्षेत्र (ईएसजेड) के संबंध में सर्वोच्च अदालत के आदेश और इस मामले में केरल सरकार की कथित चुप्पी को लेकर कांग्रेस ने यह हड़ताल आयोजित की।
पथनमथिट्टा, सात जून केरल के पथनमथिट्टा जिले की सात पंचायतों में मंगलवार को कांग्रेस की ओर से आयोजित एक दिवसीय हड़ताल के कारण दुकानें बंद रहीं और सड़कों पर वाहन नहीं दिखे। संरक्षित वन के पास पर्यावरण के लिहाज से संवदेनशील क्षेत्र (ईएसजेड) के संबंध में सर्वोच्च अदालत के आदेश और इस मामले में केरल सरकार की कथित चुप्पी को लेकर कांग्रेस ने यह हड़ताल आयोजित की।
शीर्ष अदालत ने हाल ही में एक निर्देश जारी किया था कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों सहित प्रत्येक संरक्षित वन के बाहर एक किलोमीटर के दायरे में पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि पूरे देश के ऐसे पार्कों के भीतर खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा जिन पंचायतों में हड़ताल का आयोजन किया गया उनमें अरुवापलम, थन्नीथोड, चित्तर, वडसेरिक्कारा, पेरिनाड और सीताथोडु शामिल हैं।
सुबह छह बजे से शुरू हुई हड़ताल के बाद से मेडिकल स्टोर को छोड़कर अधिकांश दुकानें बंद रहीं और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित रहीं।
शीर्ष अदालत के निर्देश को लागू करने के संबंध में चिंता व्यक्त करने के लिए स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला और बैठकें कीं।
उन्होंने राज्य की एलडीएफ सरकार पर इस मुद्दे पर चुप रहने का भी आरोप लगाया, जिससे आम लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए तीन जून को आदेश दिया था कि ऐसे ईएसजेड के भीतर किसी भी स्थायी ढांचे की अनुमति नहीं दी जाएगी। पीठ ने कहा कि यदि स्थानीय कानून या अन्य नियम एक किलोमीटर से अधिक का ईएसजेड प्रदान करते हैं, तो पहले के प्रावधान लागू रहेंगे।
शीर्ष अदालत का आदेश वर्ष 1995 से लंबित एक जनहित याचिका को लेकर दायर आवेदनों पर आया। याचिका में राजस्थान के वन्यजीव अभयारण्य जमुआ रामगढ़ और उसके आसपास खनन गतिविधियों से संबंधित दो मुद्दों को उठाया गया है।
इसके अलावा याचिका में वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास ईएसजेड निर्धारित करने से संबंधित था। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शीर्ष अदालत के निर्देश का स्वागत किया था, लेकिन यह भी कहा कि ईएसजेड में पड़ने वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों की भी रक्षा करनी होगी।
वन मंत्री एके शशिन्द्रन ने भी हाल ही में कहा था कि इस निर्देश से केरल के लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा विशेषकर उन लोगों को, जो वर्षों से वन क्षेत्रों में रह रहे हैं या काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केरल में ऐसे 23 स्थान हैं, जहां अदालत के निर्देश का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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