नयी दिल्ली, 13 फरवरी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर पंजाब की जनता के साथ भेदभाव करते हुए उद्योगपति समूह अडाणी को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
तिवारी ने शून्यकाल में दावा किया कि पंजाब सरकार को महानदी कोलफील्ड से खरीदा जाने वाला कोयला सीधे नहीं लाकर लंबे मार्ग से लाने का निर्देश देकर अडाणी समूह को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह कोयला महानदी कोलफील्ड से सीधे रेल मार्ग से पंजाब आता है तो 1830 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।’’
तिवारी ने कहा, ‘‘ ऊर्जा मंत्रालय ने 30 नवंबर, 2022 को पंजाब सरकार को पत्र लिखकर कहा कि वह सीधे रेल मार्ग से कोयला नहीं प्राप्त कर सकती और उसे कोयला पारादीप पोर्ट ले जाना होगा और फिर जलमार्ग से श्रीलंका से होते हुए इसे गुजरात के दहेज एवं मुंदरा में अडाणी के बंदरगाहों पर पहुंचाना होगा। इसके बाद वहां से रेल मार्ग से 1500 किलोमीटर दूरी तय कर इसे पंजाब लाना होगा।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘कोयले की ढुलाई की लागत 4350 रुपये प्रति टन से बढ़कर 6750 रुपये प्रति टन हो गयी है। एक यूनिट बिजली का खर्च 3.6 रुपये से बढ़कर पांच रुपये हो गया है।’’
पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद तिवारी ने सरकार से मांग की कि इस निर्देश को वापस लिया जाए और महानदी कोलफील्ड से सीधे रेल मार्ग से कोयला लाने की अनुमति दी जाए।
तिवारी ने यह दावा ऐसे समय में किया है जब कांग्रेस समेत विपक्ष ने अडाणी-हिंडनबर्ग मुद्दे पर सरकार को घेरने का प्रयास किया है और इस मुद्दे पर जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग हो रही है।
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