पटियाला, एक अप्रैल कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को पटियाला केंद्रीय कारागार से बाहर आते ही केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि लोकतंत्र बेड़ियों में जकड़ा हुआ है और संस्थान गुलाम हो गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए षड़यंत्र रचा जा रहा है।
सिद्धू ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को “अखबारी मुख्यमंत्री” कहा और कानून-व्यवस्था तथा ऋण के मुद्दे पर उनकी सरकार की आलोचना की।
वर्ष 1988 के रोड रेज मौत के मामले में करीब 10 महीने जेल में बिताने वाले सिद्धू शनिवार को रिहा हो गए। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सिद्धू को 65 वर्षीय गुरनाम सिंह की मौत के मामले में मई 2022 में उच्चतम न्यायालय द्वारा एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया था।
सिद्धू के वकील ने कहा था कि जेल में उनके अच्छे आचरण के कारण उन्हें समय से पहले रिहा किया जा रहा है।
सिद्धू ने सुबह से जेल के बाहर प्रतीक्षा कर रहे पत्रकारों से कहा, "देश में जब भी तानाशाही आई तब एक क्रांति आई और आज मैं कहता हूं कि क्रांति का नाम राहुल गांधी है।"
उन्होंने कहा, "बहस और असहमति इस लोकतंत्र का सार है, लेकिन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।"
सिद्धू ने कहा कि कांग्रेस दमन के खिलाफ लड़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''आज लोकतंत्र बेड़ियों में जकड़ा हुआ है, आज लोकतंत्र जैसा कुछ भी नहीं है।''
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश रची जा रही है।
सिद्धू ने कहा, "पंजाब इस देश की ढाल है, इस ढाल को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश चल रही है।"
उन्होंने देश में अल्पसंख्यक समुदाय सिखों का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, “पंजाब में अल्पसंख्यकों का शासन है। जहां भी अल्पसंख्यक बहुसंख्यक होते हैं... केंद्र सरकार (उसके खिलाफ) साजिश रचने लग जाती है।”
सिद्धू ने आरोप लगाया कि पहले कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा की जाती है। उसके बाद इसे नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है और फिर वे कहते हैं, हम शांति लाए हैं।
उन्होंने कहा, "अगर आप पंजाब को कमजोर करते हैं तो आप खुद कमजोर हो जाएंगे। पंजाब को कमजोर करके कोई सरकार मजबूत नहीं बन सकती।"
सिद्धू जब जेल से बाहर आए तो उन्होंने आसमानी रंग की जैकेट पहन रखी थी।
माना जा रहा था कि उन्हें दोपहर तक रिहा कर दिया जाएगा लेकिन वह शाम पांच बजकर 53 मिनट पर जेल से बाहर आए।
सिद्धू (59) के समर्थक उनकी रिहाई पर उनका भव्य स्वागत करने के लिए जेल के बाहर सुबह से ही जमा थे। उन्होंने 'नवजोत सिद्धू जिंदाबाद' के नारे लगाए।
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