देश की खबरें | ठेकेदार की मौत के मामले में कांग्रेस ने ईश्वरप्पा के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की
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बेंगलुरू, 15 अप्रैल कर्नाटक सरकार और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई पर ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री के एस ईश्वरप्पा को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए विपक्षी कांग्रेस ने शुक्रवार को उनकी गिरफ्तारी और उन पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग की।
कांग्रेस ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के किसी सेवारत न्यायाधीश की निगरानी में पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच कराने का भी अनुरोध किया।
पुलिस ने ईश्वरप्पा के खिलाफ ठेकेदार संतोष के . पाटिल को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। वह शुक्रवार देर शाम को मुख्यमंत्री बोम्मई को अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
कर्नाटक में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ हमले तेज कर दिये हैं। उसने नौ दलों का गठन किया है। पार्टी के अनुसार हर दल कम से कम दो या तीन जिलों में जाकर लोगों को ‘‘मौजूदा भाजपा सरकार में 40 प्रतिशत कमीशन और अंधाधुंध भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी देगा।’’
पार्टी ने विधान सौध में रातभर धरना दिया था। उसने कहा कि उसकी विधानसभा क्षेत्रों के स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना है ताकि जनता को पता चले कि ‘कर्नाटक को भाजपा ने भ्रष्टाचार की राजधानी बना दिया है’।
कांग्रेस ने विजयनगर जिले के होसपेट में भी विरोध रैली आयोजित करने की योजना बनाई है जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा की उपस्थिति में पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होने जा रही है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘शिकायत में स्पष्ट आरोप है, संतोष पाटिल ने मीडिया के सामने भी कहा है। इसके बावजूद जानबूझकर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी। केवल उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार और पुलिस जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम मांग करते हैं कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन्हें (ईश्वरप्पा को) तत्काल गिरफ्तार किया जाए क्योंकि आरोप जघन्य अपराध के हैं।’’
उन्होंने मांग की कि मृतक संतोष पाटिल के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और उनके किसी परिजन को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।
सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि ईश्वरप्पा को बचाने के मकसद से किसी तरह मामले को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बोम्मई खुद मंत्री को बेगुनाही का प्रमाणपत्र दे रहे हैं, ऐसे में निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती।
उन्होंने मांग की कि उच्च न्यायालय के किसी सेवारत न्यायाधीश की निगरानी में पुलिस द्वारा जांच कराई जानी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार ने भी सवाल उठाया कि ईश्वरप्पा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधानों के तहत मामला क्यों नहीं दर्ज किया गया।
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