देश की खबरें | कांग्रेस ने मोदी सरकार की चीन नीति की आलोचना की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस ने सोमवार को चीनी अतिक्रमण को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या सरकार ने डेपसांग और डेमचोक में हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर ‘‘चीनी कब्जे के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है’’ और क्या यह अब भी पांच मई, 2020 से पहले की स्थिति में लौटने का प्रयास कर रही है।

नयी दिल्ली, छह मई कांग्रेस ने सोमवार को चीनी अतिक्रमण को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या सरकार ने डेपसांग और डेमचोक में हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर ‘‘चीनी कब्जे के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है’’ और क्या यह अब भी पांच मई, 2020 से पहले की स्थिति में लौटने का प्रयास कर रही है।

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प के चार साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी चीन नीति की ‘घोर विफलता’ की जिम्मेदारी कब लेंगे।

पूर्वी लद्दाख में झड़प के बाद 15 जून, 2020 को गल्वान में हुए हिंसक संघर्ष में 20 सैनिक मारे गए थे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘पिछले कई दशकों में भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक और खुफिया चूक के लिए क्या किसी को जवाबदेह ठहराया गया।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया, ‘‘क्या आप अब भी 19 जून, 2020 के अपने बयान - ‘‘ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है’ को सही मानते हैं जो गल्वान में हमारे 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद आपने दिया था।’’

रमेश ने कहा, ‘‘क्या आपकी सरकार ने डेपसांग और डेमचोक में हजारों वर्ग किलोमीटर पर चीनी कब्जे के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है या आप अब भी 5 मई, 2020 से पहले की स्थिति में लौटने की कोशिश कर रहे हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हमारे 20 सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के महज चार दिन बाद प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए चीन को ‘क्लीन चिट’ दे दी थी कि ‘ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है’। प्रधानमंत्री का ऐसा कहना न केवल हमारे शहीद जवानों का घोर अपमान था बल्कि पूर्वी लद्दाख में हमारी 2,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक जमीन पर चीन के कब्जे को वैध ठहराने वाला भी था।’’

रमेश ने दावा किया कि चार साल में सैन्य वार्ता के 21 दौर के बावजूद हालात प्रतिकूल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि लेह के पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट जाहिर किया है कि हमारे सैनिक 65 गश्ती बिंदुओं में से 26 पर नहीं पहुंच पा रहे जहां वे पांच मई, 2020 से पहले पहुंचने में सक्षम थे।

उन्होंने कहा, ‘‘चीन की आक्रामकता और घुसपैठ केवल लद्दाख तक ही सीमित नहीं है। अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है जो भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सीधा खतरा पैदा करने वाला है। यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।’’

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