नयी दिल्ली, 13 अगस्त कांग्रेस ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूलचूल बदलाव करने के उद्देश्य से तीन नये विधेयक लाये जाने को लेकर रविवार को गृहमंत्री अमित शाह पर इसके कुछ प्रावधानों के बारे में संसद और लोगों को "गुमराह" करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने प्रस्तावित कानूनों पर विशेषज्ञों और जनता को शामिल करते हुए व्यापक विचार-विमर्श की मांग की।
विपक्षी दल कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मानसून सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए इन विधेयकों को सरकार ‘‘बिना किसी परामर्श के गुपचुप और अपारदर्शी तरीके से लायी।’’
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा कि 11 अगस्त को, बिना किसी पूर्व सूचना या सार्वजनिक परामर्श या कानूनी विशेषज्ञों, न्यायविदों, अपराध विज्ञानियों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए बिना, (नरेन्द्र) मोदी सरकार ने अपने ‘पिटारे’ से तीन विधेयक पेश किए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘गृहमंत्री की शुरुआती टिप्पणी से यह तथ्य सामने आया कि अमित शाह पूरी कवायद से स्वयं अनभिज्ञ थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जनता या हितधारकों के सुझावों और समझ से दूर एक गुप्त कवायद से केवल कुछ श्रेय लिया जा सकता है, लेकिन इससे देश के आपराधिक कानून के ढांचे में सुधार के सार्वजनिक उद्देश्य को पूरा नहीं किया जा सकता।’’
उन्होंने मौजूदा और प्रस्तावित कानूनों की व्यापक "पड़ताल" के बाद कहा कि आतंकवाद और आतंकवादी कृत्यों की विस्तृत परिएं इंदिरा गांधी के समय से ही मौजूद हैं और ‘‘भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में आतंकवादियों की परि एक ढकोसला है।’’
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