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देश की खबरें | बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी शैली में परीक्षाएं आयोजित करना विकल्प नहीं है : विशेषज्ञ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अकादमिक जगत के विद्वानों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विश्वविद्यालयों में बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी शैली में परीक्षाएं आयोजित करना व्यावहारिक विकल्प नहीं है क्योंकि इससे विद्यार्थियों के विश्लेषण कौशल की परख नहीं हो सकती तथा साहित्य जैसे विषयों की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का नुकसान ही होगा।

देश की खबरें | बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी शैली में परीक्षाएं आयोजित करना विकल्प नहीं है : विशेषज्ञ
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 23 जुलाई अकादमिक जगत के विद्वानों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विश्वविद्यालयों में बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी शैली में परीक्षाएं आयोजित करना व्यावहारिक विकल्प नहीं है क्योंकि इससे विद्यार्थियों के विश्लेषण कौशल की परख नहीं हो सकती तथा साहित्य जैसे विषयों की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का नुकसान ही होगा।

इन विद्वानों की चिंता तब आयी है जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं दीर्घकालिक प्रारूप के बजाय बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी, खुला विकल्प, कार्य जैसे विकल्पों से करायी जा सकती हैं।

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हालांकि यूजीसी अधिकारियों ने कहा कि देश में 6000 से अधिक विश्वविद्यालय पहले ही अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाएं करवा चुके हैं या कराने की योजना बना रहे हैं।

इस माह के प्रारंभ में यूजीसी ने अपने संशेाधित दिशानिर्देशों में उच्च शिक्षण संस्थानों को जुलाई 2020 के बजाय सितंबर 2020 में परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश दिया था। यूजीसी ने पहले ये परीक्षाएं अप्रैल में कराने का निर्देश दिया था।

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पंजाब, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और दिल्ली कोविड-19 की स्थिति का हवाला देते हुए पहले ही (सितंबर, 2020 में परीक्षाएं आयेाजित करने की) इस योजना पर अपनी आपत्ति जता चुके हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और कार्यकारी परिषद के सदस्य राजेश झा ने कहा, ‘‘ हमारे विद्यार्थी परीक्षा के नये स्वरूप के लिए तैयार नहीं हैं। उन्हें चीजों का विश्लेषण करने का पाठ पढ़ाया गया है और वे नये स्वरूप के लिए अपने आप को तैयार नहीं पायेंगे। अचानक आप कोई व्यवस्था नहीं थोप सकते। उसे लागू करने से पहले उसे परखना होगा। कोरोना वायरस का समय प्रयोग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।’’

श्री गुरू तेग बहादुर कॉलेज के अंग्रेजी के प्रोफेसर और अकादमिक परिषद के सदस्य सैकत घोष ने कहा, ‘‘ जिस तरह से विषय और पाठ्यक्रम तैयार किये गये हैं, उस हिसाब से हम स्नातक स्तर पर भी विषयों को विशद रूप से पढ़ाते हैं और हम विद्यार्थियों को विश्लेषण कौशल के लिए प्रेरित करते हैं। विश्लेषण कौशल को बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तरी से नहीं परखा जा सकता है क्योंकि यह सूचना का पक्ष लेता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षण संघ ने इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को एक बैठक बुलायी है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2020 05:18 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).