देश की खबरें | अदालत परिसर में गोलीबारी की घटनाओं से चिंतित न्यायालय ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए निर्देश जारी किए

नयी दिल्ली, 12 अगस्त दिल्ली की अदालतों में गोलीबारी की हालिया घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने देश भर के प्रत्येक न्यायिक परिसर में स्थायी अदालत सुरक्षा इकाइयों (सीएसयू) की तैनाती सहित एक सुरक्षा योजना की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं ना केवल न्यायाधीशों बल्कि वकीलों, अदालत के कर्मचारियों, वादियों और आम जनता की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करती हैं। न्यायालय ने अदालत परिसर में सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई निर्देश जारी किए है।

शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कहा कि एक ऐसे स्थान के रूप में अदालत की पवित्रता को बनाए रखने से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है जहां न्याय किया जाता है और कानून के शासन को बरकरार रखा जाता है।

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि यह जरूरी है कि न्यायिक संस्थान सभी हितधारकों की भलाई की रक्षा के लिए व्यापक कदम उठाएं। पीठ ने कहा, ‘‘न्याय के मंदिरों में आने वाले वादियों के लिए क्या उम्मीदें कमजोर नहीं होंगी, अगर न्याय के मंदिर में ही सुरक्षा कवच का अभाव है? जब न्याय प्रदान करने वाले लोग ही असुरक्षित होंगे तो वादी अपने लिए न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं?’’

पीठ ने कहा, ‘‘यह भयावह है कि राष्ट्रीय राजधानी के अदालत परिसर में ही पिछले एक साल में गोलीबारी की कम से कम तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं। यह महत्वपूर्ण है कि न्यायिक संस्थान सभी हितधारकों की भलाई की रक्षा के लिए व्यापक कदम उठाएं।’’

हाल के दिनों में दिल्ली के कई अदालत परिसरों में गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं। इस साल जुलाई में तीस हजारी अदालत में वकीलों के दो गुटों के बीच तीखी बहस के बाद गोलीबारी की घटना सामने आई थी। अप्रैल में रोहिणी अदालत परिसर में वकीलों और उनके मुवक्किलों के बीच विवाद के बाद गोलीबारी की घटना हुई थी। इसी महीने साकेत अदालत परिसर में वकील ने एक महिला को गोली मार दी थी।

कुख्यात गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की सितंबर 2021 में रोहिणी अदालत परिसर में दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उसके हत्यारों को दिल्ली पुलिस ने परिसर में ही मार गिराया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि सीसीटीवी कैमरों सहित आधुनिक सुरक्षा उपाय होने के बावजूद अदालत की सुरक्षा में खामियां अक्सर होती रही हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘यह इस तथ्य का द्योतक है कि न्यायिक प्रणाली में सभी हितधारकों का विश्वास बनाए रखने के लिए प्रणालीगत उपाय आवश्यक हैं। हमारे विचार से केवल सीसीटीवी कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं हो सकता है। न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली के हितधारकों की सुरक्षा से समझौता करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए कुछ और कदम उठाने की आवश्यकता है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, यह तत्काल उपायों के महत्व को कम नहीं करता है, जिन्हें संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल मुद्दों को संबोधित करने के लिए किए जाने की आवश्यकता है। इसके साथ दीर्घकालिक समाधान पर कदम उठाने की जरूरत है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालयों को प्रमुख सचिवों, प्रत्येक राज्य सरकार के गृह विभागों और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों या पुलिस आयुक्तों के परामर्श से एक सुरक्षा योजना तैयार करनी चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘सुरक्षा योजना में प्रत्येक परिसर में स्थायी अदालत सुरक्षा इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव शामिल हो सकता है, जिसमें ऐसी प्रत्येक इकाई के लिए सशस्त्र/निहत्थे कर्मियों और पर्यवेक्षी अधिकारियों की तैनाती की जा सकती है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इसमें न्यूनतम अवधि और ऐसी कर्मियों की तैनाती का तरीका, कर्तव्यों की सूची और ऐसे कर्मियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय लाभ पेश किए जा सकते हैं।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे कर्मियों को अदालत की सुरक्षा के मामलों में प्रशिक्षण और संवेदनशील बनाने के लिए विशेष मॉड्यूल होने चाहिए। पीठ ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाने की रूपरेखा जिला आधार पर बनानी होगी, जहां संबंधित राज्य सरकारों को ऐसी योजना के क्रियान्वयन के लिए समय पर आवश्यक धन उपलब्ध कराना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘‘इसके अलावा, सुरक्षा योजना को अंतिम रूप देने पर, उच्च न्यायालय स्थानीय आवश्यकताओं के विश्लेषण के लिए संबंधित जिला और सत्र न्यायाधीशों को सीसीटीवी कैमरे की स्थापना और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।’’

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अदालत परिसरों के प्रवेश और निकास बिंदुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कर्मी तैनात किए जाएं। पीठ ने कहा कि इस संबंध में, अदालतें समग्र सुरक्षा बढ़ाने के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मियों की तैनाती, वाहनों के लिए सुरक्षा स्टिकर, तलाशी, मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, अदालत-विशिष्ट प्रवेश पास और बायोमेट्रिक डिवाइस जैसे सुरक्षा उपाय करने पर विचार कर सकती हैं। पीठ ने कहा कि जरूरी होने पर अन्य सुरक्षा उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने कई मौकों पर, विशेषकर जिला स्तर पर न्यायिक बुनियादी ढांचे के डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है। पीठ ने कहा, ‘‘मुकदमे में साक्ष्य और गवाही की रिकॉर्डिंग के लिए ऑडियोविजुअल तकनीक, वीडियोकांफ्रेंस सुविधा, सभी स्तरों पर अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में ई-सेवा केंद्रों की स्थापना जैसी पहल पर भी विचार किया जा सकता है।’’

पीठ ने आदेश दिया कि आदेश की प्रतियां संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष रखे जाने के लिए रजिस्ट्री द्वारा प्रत्येक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रस्तुत की जाएंगी। ये निर्देश देश भर के अदालत कक्षों में न्यायाधीशों की सुरक्षा और सुरक्षा उपायों से संबंधित याचिकाओं पर आए।

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