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रैपिड टेस्ट किट में मिली शिकायतें, राज्य दो दिन तक इनका इस्तेमाल न करें : आईसीएमआर

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस किट के परीक्षण परिणाम में अंतर मिलने के बारे में एक राज्य से मिली शिकायत के आधार पर तीन अन्य राज्यों से इसकी पुष्टि की गयी। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के विशेषज्ञों को विभिन्न क्षेत्रों में इस किट से परीक्षण के लिये भेजा गया है।

रैपिड टेस्ट किट में मिली शिकायतें, राज्य दो दिन तक इनका इस्तेमाल न करें : आईसीएमआर
जमात

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर निगरानी के लिये राज्यों को दी गयी रैपिड टेस्टिंग किट के परीक्षण परिणाम में अंतर मिलने की शिकायतों के मद्देनजर उन्हें अगले दो दिन तक इसका इस्तेमाल नहीं करने का परामर्श दिया गया है।

आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक रमन आर गंगाखेड़कर ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस किट के परीक्षण परिणाम में अंतर मिलने के बारे में एक राज्य से मिली शिकायत के आधार पर तीन अन्य राज्यों से इसकी पुष्टि की गयी। उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के विशेषज्ञों को विभिन्न क्षेत्रों में इस किट से परीक्षण के लिये भेजा गया है।

गंगाखेड़कर ने कहा कि कोरोना वायरस के परीक्षण के लिये इस्तेमाल होने वाली आरटी-पीसीआर किट और रैपिड टेस्टिंग किट के परिणाम में काफी अंतर मिला है। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर के विशेषज्ञों द्वारा दो दिन में वस्तुस्थिति का पता लगाने के साथ ही राज्यों को इस किट के उपयोग के बारे में परामर्श जारी किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि अगर किट के बैच संबंधी तकनीकी परेशानी पायी जाती है तो इसकी आपूर्ति करने वाली कंपनी से इसे बदलने के लिये कहा जायेगा। उन्होंने कहा कि इस बीच आईसीएमआर ने किट में तकनीकी परेशानी का हल किये जाने तक सभी राज्यों को दो दिन तक रैपिड किट से परीक्षण नहीं करने को कहा है।

इस बीच कोरोना संकट से निपटने के लिये गठित उच्चाधिकार प्राप्त समूह की ओर से बताया गया कि कोरोना के खिलाफ अभियान में व्यापक पैमाने पर मानव संसाधन की जरूरत को पूरा करने के लिये सरकार ने देश भर में मौजूद ‘कोरोना योद्धाओं’ (स्वास्थ्य कर्मियों और वॉलेंटियर) का डाटाबेस तैयार कर लिया है। समूह के अध्यक्ष ने बताया कि इसके लिये दो वेबपोर्टल (‘कोविड वॉरियर डॉट जीओवी डॉट इन’ तथा ‘आईगॉट डॉट जीओवी डॉट इन’) शुरु किये गये हैं।

उन्होंने बताया कि लॉकडाउन में सीमित छूट दिये जाने और लॉकडाउन के बाद संक्रमण रोकने के लिये उचित प्रबंधन करने में वॉलेंटियर की मदद ली जायेगी। पोर्टल के जरिये अब तक देश में 1.24 करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और वॉलेंटियर आदि ने पंजीकृत करा लिया है।

उन्होंने बताया कि इन दोनों ऑनलाइन प्लेटफार्म की मदद से स्वास्थ्य कर्मियों और वॉलेंटियर की जरूरत वाले स्थानों पर तैनाती की जा रही है और कोरोना संकट से निपटने से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वॉलेंटियर की जिम्मेदारियों को 20 वर्गों में श्रेणीबद्ध कर राज्य सरकारों की मदद से जरूरत वाले स्थानों पर तैनाती की जा रही है।

उन्होंने बताया कि पोर्टल के जरिये स्वास्थ्यकर्मियों और वॉलेंटियर सहित सभी वर्ग के लोगों को कोरोना संक्रमण रोकने के शुरुआती दौर के उपायों से लेकर आईसीयू में मरीज की देखरेख तक, विभिन्न प्रकार के कामों को करने का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले 24 घंटों के दौरान देश में कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामलों में कमी आने और स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज होने की जानकारी दी।

मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 18,601 पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़कर 3252 हो गयी है।

उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 705 थी, यह एक दिन में सर्वाधिक स्वस्थ होने वालों की संख्या है। अग्रवाल ने कहा कि इसके साथ ही स्वस्थ होने वाले मरीजों का प्रतिशत 14.75 से बढ़कर 17.48 हो गया है।

उन्होंने बताया कि 24 घंटे में संक्रमण के 1336 नये मामले सामने आये। सोमवार को यह संख्या 1553 थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की कुल संख्या 590 हो गयी है। पिछले 24 घंटों में संक्रमण से मौत के 47 नये मामले सामने आये हैं। उल्लेखनीय है कि सोमवार को 24 घंटों में मरने वालों की संख्या 36 थी।

अग्रवाल ने बताया कि जिन जिलों में 28 दिनों से एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है उनमें पुडुचेरी के माहे, कर्नाटक के कोडागु और उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल के अलावा राजस्थान का प्रतापगढ़ जिला शामिल है। वहीं, 23 राज्यों के 61 जिले ऐसे भी हैं जिनमें पिछले 14 दिनों से संक्रमण के किसी मामले की पुष्टि नहीं हुयी है। सोमवार तक ऐसे जिलों की संख्या 59 थी।

अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने गैर कोविड-19 अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने की घटनाओं के मद्देनजर ऐसे अस्पतालों के लिये पृथक दिशानिर्देश भी जारी किये हैं। इनके तहत सभी अस्पतालों को आपदा प्रबंधन कार्ययोजना बना कर उसे अमल में लाने को कहा गया है।

अग्रवाल ने बताया कि इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में रक्त की उपलब्धता बनाये रखने के लिये भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी से रियल टाइम निगरानी तंत्र को सुचारु रखने को कहा है। साथ ही रक्त की यथाशीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये एक हेल्पलाइन (011-23359379) भी शुरु की गयी है। इस पर जरूरतमंद लोग कभी भी किसी भी ग्रुप के रक्त की मांग पूरी कर सकेंगे।

इस दौरान गंगाखेडकर ने बताया कि देश में अब तक कोरोना वायरस के 4,49,810 परीक्षण किये जा चुके हैं। इनमें 35,832 परीक्षण पिछले 24 घंटों में किये गये। इनमें आईसीएमआर की 201 प्रयोगशालाओं में 29,776 परीक्षण और निजी क्षेत्र की 86 प्रयोगशालाओं में 6076 परीक्षण किये गये।

संवाददाता सम्मेलन में गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि संक्रमण की अधिकता वाले राज्यों में लॉकडाउन के पालन की स्थिति का आकलन करने के लिये मंत्रालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समूहों ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान और पश्चिम बंगाल का दौरा किया।

उन्होंने बताया कि इन समूहों को महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। लेकिन पश्चिम बंगाल में कोलकाता और जलपाईगुड़ी जिलों में जमीनी हकीकत का आकलन करने में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने की मंत्रालय को जानकारी दी गयी है।

श्रीवास्तव ने कहा कि इसके मद्देनजर मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिखकर सभी जरूरी इंतजाम करने को कहा है जिससे केन्द्रीय समूह अपना काम कर सकें।

उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने जिन शहरों में लॉकडाउन के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं उनमें इसका पालन सुनिश्चित कराने में मदद और स्थिति के आकलन के लिये छह अंतर मंत्रालयी समूह गठित किये हैं।

संक्रमण की स्थिति में सुधार नहीं होने और लॉकडाउन का शत-प्रतिशत पालन नहीं हो पाने वाले जिलों में राजस्थान का जयपुर, मध्य प्रदेश का इंदौर, पश्चिम बंगाल के कोलकाता, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और 24 परगना और महाराष्ट्र का मुंबई एवं पुणे सहित कुछ अन्य जिले शामिल हैं। केन्द्रीय दल इन जिलों का दौरा कर स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 09:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).