विदेश की खबरें | ‘‘पूर्व के अनुमान की तुलना में कम लोगों के संक्रमित होने पर विकसित हो सकती है सामुदायिक प्रतिरक्षा’’

लंदन, 24 जून वैज्ञानिकों का मानना है कि पहले लगाए गए अनुमान की तुलना में कम लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद कोविड-19 से लड़ने के लिए सामुदायिक प्रतिरक्षा विकसित हो जाने की संभावना है।

ब्रिटेन के नॉटिंघम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों समेत अनुसंधानकर्ताओं के एक दल के हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है।

यह भी पढ़े | चीन ने 4 और मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अमेरिका को दी चेतावनी.

सामुदायिक प्रतिरक्षा तब विकसित होती है, जब बड़ी संख्या में लोगों में किसी बीमारी को लेकर प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और इसके बाद बीमारी फैलनी बंद हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने इस बात को रेखांकित किया है कि सामुदायिक प्रतिरक्षा तब विकसित होती है, जब लोगों में किसी बीमारी से लड़ने के लिए प्राकृतिक रूप से या टीका लगाने से प्रतिरोधी क्षमता पैदा हो जाती है।

यह भी पढ़े | COVID-19: ऑस्ट्रेलिया में एक महीने से अधिक समय में पहली मौत, संक्रमितों की संख्या 7,500 के पार.

उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर लेते है, तो बीमारी के फैलने की गति धीमी हो जाती है या रुक जाती है और संक्रमण फैलने की श्रृंखला टूट जाती है।

‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, गणित के एक मॉडल के आधार पर पाया गया कि पहले जताए गए 60 प्रतिशत के अनुमान के बजाए 43 प्रतिशत लोगों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाने पर कोविड-19 से लड़ने के लिए सामुदायिक प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि कोविड-19 के खिलाफ सामुदायिक प्रतिरक्षा के मामले में अक्सर कहा गया है कि महामारी को फैलने से रोकने के लिए करीब 60 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण करना होगा। हालिया अध्ययन के अनुसार, 60 प्रतिशत के बजाए 43 प्रतिशत लोगों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित होने के बाद सामुदायिक प्रतिरक्षा विकसित हो जाएगी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)