जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा पर गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति विचार करे: न्यायालय
न्यायालय ने कहा कि इस केन्द्र शासित प्रदेश के ‘उग्रवाद से ग्रस्त’ होने के तथ्य के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव अधिकारों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
नयी दिल्ली, 11 मई उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने के आवेदनों पर विचार के लिये गृह सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय विशेष समिति गठित करने का सोमवार को आदेश दिया।
न्यायालय ने कहा कि इस केन्द्र शासित प्रदेश के ‘उग्रवाद से ग्रस्त’ होने के तथ्य के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव अधिकारों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वैश्विक महामारी और राष्ट्रीय लॉकडाउन को देखते हुये केन्द्र शासित प्रदेश में बेहतर इंटरनेट सेवा अपेक्षित है।
न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, सीमा पार से घुसपैठ करने और राष्ट्र की अखंडता को अस्थिर करने के बाहरी ताकतों के प्रयासों तथा कुछ घटनाओं में निर्दोष नागरिकों और सुरक्षा बल के सदस्यों की मृत्यु के तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’
पीठ ने अपने 19 पेज के फैसले में कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के संवेदनशील काम को बहुत ही गंभीरता से ले रही है। पीठ ने अपने पहले के एक फैसले का भी हवाला दिया जिसमे आपात स्थिति का मुकाबला करने के लिये हकीकत में प्रतिबंधों और इसके दायरे की आवश्यकता का जिक्र किया गया था।
पीठ ने कहा कि हम इस तथ्य को समझते हैं कि जम्मू कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश उग्रवाद से ग्रस्त है और इस मामले से जुड़े मुद्दे केन्द्र शासित प्रदेश तथा केन्द्र दोनों से ही संबंधित है, इसलिए समीक्षा समिति में दोनों के ही वरिष्ठ अधिकारियों को एकसाथ विचार करना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हम, इसलिए, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सचिवों की विशेष समिति गठित करना उचित समझते हैं जो जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति और वहां प्रतिबंध जारी रखने की तात्कालिक आवश्यता पर विचार करेगी।’’
इस समिति की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के सचिव करेंगे और इसमें संचार मंत्रालय के सचिव और केन्द्र शासित जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव सदस्य होंगे
न्यायालय ने कहा कि इस समिति को निर्देश दिया जाता है कि वह इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश सामग्री और तथ्यों तथा कुछ क्षेत्रों तक प्रतिबंधों को सीमित करने संबंधी वैकल्पिक सुझाव पर विचार करे और सरकार को हमारे निर्देशों के अनुरूप सलाह दे।’’
न्यायालय ने सीमा पार से घुसपैठ, विदेशी प्रभाव, हिंसक उग्रवाद और राष्ट्रीय एकता से संबंधित मुद्दों पर केन्द्र की इन दलीलों का संज्ञान लिया और कहा कि ये गंभीर मुद्दे हैं। केन्द्र ने कतिपय सामग्री की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया था जिससे संकेत मिलता है कि घाटी में साइबर आतंकवाद बढ़ रहा है।
न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा की बहाली के लिये फाउन्डेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स, सोएब कुरैशी और जम्मू कश्मीर के निजी स्कूलों की एसोसिएशन की याचिका पर पिछले सप्ताह सुनाई पूरी की थी।
केन्द्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन ने इस केन्द्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवाओं की बहाली का विरोध करते हुये कहा था कि इंटरनेट की तेज गति का उपयोग सेना के आवागमन संबंधी सूचनाओं को प्रेषित करने के लिये हो सकता है। इस संबंध में हंदवाड़ा में आतंकवादियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में बल के दो वरिष्ठ अधिकारियों सहित पांच सदस्यों की शहादत का भी जिक्र किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान इलाज के लिये चिकित्सकों से संपर्क करना संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के अधिकार का हिस्सा है और न्यायालय को देखना चाहिए कि क्या कोविड-19 महामारी के मद्देनजर इससे वंचित किया जा सकता है।
याचिकाओं में यह आरोप भी लगाया था कि घाटी में स्कूली बच्चों को उच्च गति की इंटरनेट सेवा के अभाव में पढ़ाई से वंचित किया जा रहा है।
अनूप
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(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2020 04:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

