जरुरी जानकारी | कोयला ब्लाकों की वाणिज्यिक नीलामी: न्यायालय झारखंड की याचिका पर उसके मूल वाद के साथ करेगा सुनवाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वाणिज्यक खनन के लिये 41 कोयला ब्लाक की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के केन्द्र के निर्णय को चुनौती देने वाली झारखंड की याचिका पर अगले सप्ताह सुनाई की जायेगी।
नयी दिल्ली, छह जुलाई उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वाणिज्यक खनन के लिये 41 कोयला ब्लाक की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के केन्द्र के निर्णय को चुनौती देने वाली झारखंड की याचिका पर अगले सप्ताह सुनाई की जायेगी।
प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा कि इस याचिका पर झारखांड सरकार द्वारा केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाले वाद के साथ ही सुनवाई की जायेगी। राज्य सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर इस वाद में केन्द्र पर आरोप लगाया है कि उसने वाणिज्यिक खनन के लिये कोयला ब्लाकों की नीलामी के बारे में राज्य सरकार से परामर्श के बगैर ही एकतरफा घोषणा की है।
इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही झारखंड की ओर से पेश वकील ने पीठ को सूचित किया कि राज्य ने इसी मुद्दे पर केन्द्र के खिलाफ अलग से वाद दायर किया है और दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की जानी चाहिए।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मामले को एक सप्ताह के लिये स्थगित किया जाये। याचिकाकर्ता के एडवोकेट ऑन रिकार्ड द्वारा लिखे गये पत्र के मद्देनजर इस याचिका को उसके साथ ही संलग्न कर दिया जाये।’’
झारखंड में वाणिज्यिक खनन के लिये 41 कोयला ब्लाक की डिजिटल नीलामी करने की केन्द्र सरकार की कार्रवाई को चुनौती देते हुये दायर याचिका के तुरंत बाद ही राज्य सरकार ने अनुच्छेद 131 के तहत अपना अलग से वाद प्रस्तुत कर दिया।
इस वाद में राज्य ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान ही केन्द्र द्वारा इस तरह से नीलामी करना अनुचित है क्योंकि राज्य और केन्द्र की सारी मशीनरी इस समय खतरनाक संक्रमण की वजह से जनता के सामने उत्पन्न परेशानियों से निबटने में व्यस्त है।
इसमें कहा गया है कि झारखंड की सीमा में स्थित नौ कोयला ब्लाक की वाणिज्यिक खनन के लिये नीलामी के केन्द्र की कार्रवाई को मनमाना और गैरकानूनी बताने के लिये ही यह वाद दायर किया गया है।
इस वाद में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी (केन्द्र) ने वादी से परामर्श के बगैर ही नीलामी की एकतरफा घोषणा की है। वादी राज्य उसकी सीमा के भीतर स्थित इन खदानों और खनिज संपदा का मालिक है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘फरवरी, 2020 की बैठक का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इसमें कोविड-19 की वजह से बदली हुये परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखा गया है। कोविड-19 महामारी, जिसने देश को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में अभूतपर्वू ठहराव ला दिया है, की वजह से नये सिरे से वादी के साथ परामर्श की आवश्यकता है ।’’
वाद में पांच और 23 फरवरी को हुयी बैठकों का जिक्र करते हुये कहा गया है कि केन्द्र ने राज्य द्वारा उठाई गयी आपत्तियों पर विचार नहीं किया है। इसी तरह वाद में संविधान की पांचवी अनुसूची का जिक्र करते हये कहा गया है कि झारखंड में नौ कोयला ब्लाक में से छह-चकला, चितरपुर, उत्तरी ढाडू, राजहर उत्तर, सेरगढ़ और उर्मा पहाड़ीटोला-जिन्हें नीलामी के लिये रखा गया है, पांचवी अनुसूची के इलाके हैं।
इसमें कहा गया है कि झारखंड की 3,29,88,134 आबादी में से 1,60,10,448 लोग आदिवासी इलाकों में रहते हैं।
वाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि केन्द्र की कार्रवाई पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करती है और इससे राज्य के पर्यावरण, वन और जमीन को अपूर्णीय क्षति होगी।
वाद के अनुसार मौजूदा स्थिति नीलामी के अनुरूप नहीं है क्योकि यह विकास की गिरती दर और कमजोर आर्थिक स्थिति से प्रभावित होगी। इसमें कहा गया है कि राज्य से उचित तरीके से परामर्श आऔर तालमेल के बगैर ही नीलामी के लिये 18 जून से निविदा प्रक्रिया शुरू करना अनुचित है ।
अनूप
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