नयी दिल्ली, 19 जनवरी उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने अधिवक्ता आर. जॉन सत्यन को मद्रास उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की अपनी 16 फरवरी, 2022 की सिफारिश को दोहराया है।
कॉलेजियम ने सत्यन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गईं टिप्पणियों को नजरअंदाज किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना भी शामिल है। खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने सत्यन की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई है।
प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने कहा कि इसने 17 जनवरी, 2023 को अपनी बैठक में अधिवक्ता सत्यन को मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अपनी पहले की सिफारिश को दोहराया है।
कॉलेजियम में न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ भी शामिल हैं।
कॉलेजियम ने कहा कि आईबी ने सत्यन के सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई है। हालांकि, साथ ही यह भी कहा है कि उनकी एक अच्छी व्यक्तिगत और पेशेवर छवि है और उनकी सत्यनिष्ठा के संबंध में कुछ भी प्रतिकूल नहीं पाया गया है।
इसने कहा कि सत्यन ईसाई समुदाय से हैं और आईबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है।
उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया, ‘‘इस दृष्टि से, कॉलेजियम की यह सुविचारित राय है कि आर. जॉन सत्यन मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए उपयुक्त हैं। इसलिए, कॉलेजियम उनकी नियुक्ति के लिए 16 फरवरी, 2022 की अपनी सिफारिश को दोहराता है।’’
कॉलेजियम ने कहा कि जब उसने पहली बार सत्यन को न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की, तो सभी सलाहकार-न्यायाधीशों - न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी (अब सेवानिवृत्त), न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश - ने उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त पाया था।
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