देश की खबरें | देश की लंबी तटरेखा की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तटरक्षक बल: महानिदेशक

कोलकाता, 12 जनवरी भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक वी.एस. पठानिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश रणनीतिक रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित है और इसलिए तटरक्षक बल उसकी लंबी तटरेखा की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

तटरक्षक के बेड़े में त्वरित गश्ती जलपोत (एफपीवी) कमला देवी को शामिल करते हुए उन्होंने कहा कि तटरक्षक, हिंद महासागर क्षेत्र में देश के संप्रभु समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि जलपोत कमला देवी के तटरक्षक के बेड़े में शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताएं, विशेष रूप से पूर्वी क्षेत्र में और बढ़ेंगी।

एफपीवी कमला देवी का नाम समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी कमलादेवी चट्टोपाध्याय के नाम पर रखा गया है।

तटरक्षक प्रमुख ने कहा कि थल संसाधनों के कम होने के साथ देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से अन्वेषण के लिए समुद्रों की ओर रुख हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘‘समुद्री देश होने के नाते भारत के सामने देश को समृद्धि की ओर बढ़ाने के लिए उसके समुद्री संसाधनों के यथोचित उपयोग के अवसर हैं।’’

पठानिया ने कहा कि समुद्रीय सुरक्षा की चुनौतियां और जटिलताएं भू क्षेत्रों और हवाई क्षेत्रों की सुरक्षा से कहीं भी कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के चौथे सबसे बड़े तटरक्षक बल के रूप में आईसीजी ने देश के समुद्री क्षेत्रों में भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।

पठानिया ने जलपोत के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम जीआरएसई की सराहना की।

जीआरएसई के अध्यक्ष और प्रबधन निदेशक पी आर हरि ने कहा कि स्वामी विवेकानंद की जयंती होने से आज का दिन कमला देवी जलपोत को शामिल करने के लिहाज से सबसे अच्छा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम की भारतीय तटरक्षक के साथ लंबी साझेदारी रही है।

उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल में शामिल एक शुरुआती जलपोत का निर्माण जीआरएसई ने किया था और अत्याधुनिक त्वरित गश्ती जहाज कमला देवी भारतीय तट रक्षक के लिए जीआरएसई द्वारा निर्मित सबसे नया और 36वां जलपोत है।

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