देश की खबरें | मुख्यमंत्री विजयन ने शु्क्रवार की हिंसा को पूर्वनियोजित बताया, हिमंत शर्मा ने पीएफआई पर प्रतिबंध की वकालत की

तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी/पुणे, 24 सितंबर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को कहा कि एक दिन पहले राज्य में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) प्रायोजित हड़ताल के दौरान हिंसा पूर्व नियोजित थी और आश्वस्त किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस इस्लामी संगठन पर प्रतिबंध लगाने की बात की, जिसके खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा समेत अन्य आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया है।

महाराष्ट्र के पुणे में पीएफआई के विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाये जाने को लेकर भाजपा ने नाराजगी जताई है और पार्टी के विधायकों ने ऐसा नारा लगाने वालों को नहीं बख्शने की चेतावनी दी है।

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कार्यालयों और उसके नेताओं के ठिकानों पर की गई देशव्यापी छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों में बेहद संवेदनशील सामग्री मिली है, जिसमें एक समुदाय विशेष के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया है।

कोच्चि में विशेष एनआईए अदालत में सौंपी गई रिमांड रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने यह आरोप भी लगाया है कि इस चरमपंथी इस्लामी संगठन ने युवाओं को लश्कर-ए-तैयबा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) जैसे आतंकवादी समूहों में शामिल होने के लिए बरगलाया।

एनआईए ने कोच्चि में दर्ज एक मामले के संबंध में 10 आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए 22 सितंबर को अदालत में रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीएफआई ने हिंसक जिहाद के तहत आतंकवादी कृत्यों को अंजाम दिया और भारत में इस्लामी शासन की स्थापना की साजिश रची।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पीएफआई “लोगों के एक वर्ग के समक्ष सरकारी नीतियों की गलत व्याख्या पेश कर भारत के प्रति नफरत फैलाने और सत्ता तथा उसके अंगों के खिलाफ घृणा का भाव उत्पन्न करने का काम करता है।”

एनआईए ने 22 सितंबर को 11 राज्यों में छापेमारी कर पीएफआई के 106 नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, “छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों में ऐसी सामग्री पाई गई है, जिससे पता चलता है कि एक समुदाय विशेष के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया जा रहा था। इस ‘हिट लिस्ट’ से मालूम होता है कि पीएफआई अपने नेताओं के माध्यम से समुदायों के बीच तनाव पैदा करने का काम कर रहा था।”

एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संगठन का इरादा शांति और सद्भाव को भंग करना तथा वैकल्पिक न्याय व्यवस्था चलाना था।

विजयन ने तिरुवनंतपुरम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संघ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंसा की निंदा की और कहा कि इससे राज्य में सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य के शांतिपूर्ण माहौल को नष्ट करने का प्रयास था और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

अधिकारियों ने कहा था कि देशभर में लगभग एक साथ छापेमारी में एनआईए के नेतृत्व में 22 सितंबर को विभिन्न एजेंसियों ने अभियान चलाकर 11 राज्यों में पीएफआई के 106 कार्यकर्ताओं को आतंकी गतिविधियों का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

पीएफआई ने 23 सितंबर को केरल में हड़ताल की घोषणा की थी और इस दौरान राज्य में व्यापक हिंसा हुई थी।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा पुणे में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाने वाले प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो सामने आया है। इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य में इस तरह के नारे बर्दाश्त नहीं किये जाएंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस नारेबाजी में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

भाजपा के विधायक नितेश राणे ने ट्विटर पर कहा कि जिन्होंने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

राणे ने कहा, ‘‘पुणे में पीएफआई के समर्थन में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाले सभी लोगों को चुन चुनकर मारेंगे...इतना याद रखना। पीएफआई को प्रतिबंधित करो।’’

भाजपा के एक अन्य विधायक राम सतपुते ने भी नारे लगाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के खिलाफ राष्ट्रव्यापी कार्रवाई और इसके कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ बिना अनुमति पुणे में प्रदर्शन करने के मामले में पुलिस ने 60 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुणे कलेक्ट्रेट के सामने शुक्रवार को प्रदर्शन कर रहे लोगों में से 41 को पुलिस ने हिरासत में लिया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) प्रायोजित हड़ताल के दिन केरल में हुई हिंसा की निंदा की और माकपा पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि राज्य की वाम सरकार इन हमलों के लिए समान रूप से जिम्मेदार है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केरल में पीएफआई और माकपा आपस में मिले हुए हैं। जावड़ेकर ने कहा, ‘‘कल का दिन केरल के लिए काला दिन था क्योंकि राज्यभर में लोगों को समस्याओं का समाना करना पड़ा। पीएफआई कार्यकर्ता हिंसा में शामिल थे और बस यात्रियों पर हमले किये गये। हम पीएफआई के बर्बर हमले की हिंसा करते हैं। उन्होंने कन्नूर स्थित आरएसएस कार्यालय पर भी बम से हमला किया। ऐसा पहले नहीं देखा गया था।’’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र सरकार से लगातार अनुरोध कर रही है कि वह कथित तौर पर ‘आतंकवादी गतिविधियों के लिए माहौल तैयार करने’ के कारण पीएफआई को प्रतिबंधित करे। असम पुलिस ने अब तक पीएफआई के 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

शर्मा ने कहा, ’’हमारे पास खुफिया जानकारी है कि पीएफआई ने एक ऐसा माहौल बनाया है जो कुछ लोगों को भारतीय उपमहाद्वीप में अलकायदा (एक्यूआईएस) और आतंकी संगठन आईएसआईएस द्वारा प्रायोजित कट्टरपंथ मॉड्यूल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है।'

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