देश की खबरें | बंद कमरे की बातें सार्वजनिक तौर पर नहीं कही जा सकती: सिंहदेव

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने उनके राज्य में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने के फार्मूले को लेकर चल रही चर्चा संबंधी सवाल को शुक्रवार को यह कहकर टाल दिया कि बंद कमरों की कई ऐसी बातें होती हैं, जो सार्वजनिक तौर पर नहीं कही जा सकती।

भोपाल, आठ अक्टूबर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने उनके राज्य में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने के फार्मूले को लेकर चल रही चर्चा संबंधी सवाल को शुक्रवार को यह कहकर टाल दिया कि बंद कमरों की कई ऐसी बातें होती हैं, जो सार्वजनिक तौर पर नहीं कही जा सकती।

हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस आलाकमान इस पर फैसला करेगी, उसे सार्वजनिक किया जाएगा।

उनके इस बयान से कांग्रेस नीत छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने के फार्मूले संबंधी अटकलों को बल मिला है। छत्तीसगढ़ में पिछले करीब ढाई साल से भूपेश बघेल मुख्यमंत्री हैं और मीडिया में चर्चा है कि बघेल एवं सिंहदेव को ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने का फार्मूला तय हुआ है।

सिंहदेव ने भोपाल में इस बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में पत्रकारों से कहा, ‘‘ये सारे निर्णय आलाकमान के कार्य क्षेत्र में, उसके दायरे में, उनकी जवाबदेही के होते हैं। मीडिया में (छत्तीसगढ़) में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री के संबंध में हमेशा चर्चा चलती रहती है। राजनीति में कई बातें ऐसी होती हैं….। बंद कमरों की बात को गरिमापूर्ण तरीके से गोपनीय रखा जाना चाहिए।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘और कई ऐसी बातें होती हैं जो सार्वजनिक तौर पर नहीं कही जा सकती। उन्हें कहना भी नहीं चाहिए। तो अगर राजनीतिक परिदृश्य में कोई ऐसी बात की गई है, कहीं कोई चर्चा हो रही है तो यह (कांग्रेस) आलाकमान के संज्ञान में भी होगा। इस पर निर्णय लेने का उन्हें अवसर दीजिए।’’

सिंहदेव ने बताया, ‘‘अनेकों दलों में हमने स्थायित्व के दौर भी देखें है, लंबे समय के मुख्यमंत्री भी देखें हैं, परिवर्तन भी देखें हैं। उत्तराखंड में तो हमने चार महीने में तीन मुख्यमंत्री भी देखे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह हर दल की राजनीतिक परिस्थिति है। समीक्षा के आधार पर परिवर्तन की स्थिति बनी रहती है। हमने पंजाब में भी परिवर्तन देखा, हमने अभी त्रिपुरा में कांग्रेस में भी बदलाव देखा है।’’

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