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वायुमंडलीय उष्मा और आर्द्रता से बनती मौसमी स्थितियां भारत की बढ़ा सकती हैं मुश्किलें : अध्ययन

मौसम केंद्रों के 1979 से 2017 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर शोधार्थियों ने पाया कि अध्ययन काल के दौरान भीषण उष्मा और आर्द्रता का संयोजन दोगुना हो गया है।

वायुमंडलीय उष्मा और आर्द्रता से बनती मौसमी स्थितियां भारत की बढ़ा सकती हैं मुश्किलें : अध्ययन

न्यूयॉर्क, 11 मई भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में वैश्विक तापमान में इजाफे के कारण वायुमंडलीय उष्मा और आर्द्रता के मिलने से बेहद खतरनाक मौसमी परिस्थितियां बन रही हैं। एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ जिसमें कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों के अर्थव्यवस्थाओं पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकते हैं।

मौसम केंद्रों के 1979 से 2017 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर शोधार्थियों ने पाया कि अध्ययन काल के दौरान भीषण उष्मा और आर्द्रता का संयोजन दोगुना हो गया है।

जर्नल ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, पश्चिमोत्तर ऑस्ट्रेलिया, लाल सागर के तटीय क्षेत्रों और कैलिफोर्निया की मैक्सिको की खाड़ी में भीषण उष्मा और आर्द्रता की कई घटनाएं हुईं।

वैज्ञानिकों ने कहा कि सऊदी अरब के शहर जहरान, कतर के दोहा और संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमा में सबसे ज्यादा घातक आंकड़े 14 बार दर्ज किये गए। इन शहरों की आबादी मिलाकर करीब 30 लाख है।

उन्होंने हाल में एक दर्जन से ज्यादा बार संक्षिप्त प्रकोपों को सैद्धांतिक मानव उत्तरजीविता सीमा के पार होते देखा।

अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक अब तक मौसम संबंधी ये भीषण घटनाक्रम स्थानीय इलाकों तक सीमित रहे और महज कुछ घंटों में खत्म हो गए, लेकिन अब इनके आने की आवृत्ति और तेजी बढ़ रही है।

कोलंबिया विश्वविद्यालय के पीएचडी प्रतिभागी के तौर पर अनुसंधान करने वाले इस अध्ययन के प्रमुख लेखक कोलिन रेमंड ने कहा, “पूर्व में हुए अध्ययनों में अनुमान व्यक्त किया गया था कि यह अबसे कुछ दशक बाद होगा, लेकिन यह दिखाता है कि यह अभी हो रहा है।”

रेमंड ने कहा, “इन घटनाओं के होने का समय बढ़ेगा और इनके प्रभाव में आने वाले क्षेत्र का दायरा भी वैश्विक तापमान के सीधे समानुपात में बढ़ेगा।”

पूर्व में ऐसी अजीबोगरीब घटनाएं क्यों नहीं देखी गईं, इसका जवाब देते हुए वैज्ञानिकों ने कहा कि पूर्व के अध्ययनों में आम तौर पर बड़े इलाके में उष्मा और आर्द्रता के औसत को एक बार में कई घंटों तक मापा जाता था।

हालिया अध्ययन में रेमंड और उनके सहकर्मियों ने 7877 मौसम केंद्रों से आए हर घंटे के आंकड़ों का सीधे अध्ययन किया, जिससे उन्हें छोटे इलाकों को प्रभावित करने वाले कम देर रहने वाले इन मौसमी दुष्चक्रों का भी सही पता लगाने में मदद मिली।

अध्ययन के मुताबिक आर्द्रता ने उष्मा के प्रभाव को और बुरा बना दिया क्योंकि मानव पसीने के जरिये अपने शरीर को ठंडा रखता है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि त्वचा से निकला हुआ पानी शरीर की अतिरिक्त उष्मा को बाहर कर देता है और जब यह वाष्प बनता है तो उष्मा भी ले जाता है।

यह प्रक्रिया रेगिस्तानी इलाकों में जहां अच्छे से काम करती है वहीं जिन इलाकों में आर्द्रता का स्तर अधिक रहता है वहां यह कम प्रभावी है क्योंकि हवा में पहले ही इतनी नमी होती है कि वह और अवशोषित नहीं करती।

अनुसंधानकर्ताओं ने चेतावनी दी कि इसके फलस्वरूप पसीने का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है और बेहद जटिल मामलों में यह बंद हो सकता है।

उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में जब तक कोई वातानुकूलित कमरे में नहीं जाता तो शरीर के अंदर की उष्मा उसकी सीमा से भी ज्यादा हो जाती है और अंग काम करना बंद करने लगते हैं।

अध्ययन में चेतावनी दी गई कि ऐसे में एक मजबूत और शारीरिक रूप से फिट व्यक्ति भी कुछ ही घंटों में मर जाएगा भले ही वह कपड़े उतार कर छांव में खड़ा हो और उसके पास पीने को पर्याप्त पानी भी हो।

यह अध्ययन ‘वेट बल्ब’ सेंटीग्रेड थर्मामीटर पर किया गया।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2020 05:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).