देश की खबरें | जलवायु परिवर्तन: केरल में छोटी नौका वाले मछुआरे आजीविका बचाने के लिए कर रहे हैं संघर्ष
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जलवायु परिवर्तन के खतरे के कारण केरल में छोटी नौका वाले मछुआरों को अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां दक्षिणी चेल्लनम में समुद्री तूफान से कारण बर्बाद होने वाली नौकाओं की संख्या जहां बढ़ती जा रही है, वहीं तट पर लौटे मछुआरों की टोकरी में मछलियों की संख्या घटती जा रही है।
कोच्चि, 11 जून जलवायु परिवर्तन के खतरे के कारण केरल में छोटी नौका वाले मछुआरों को अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां दक्षिणी चेल्लनम में समुद्री तूफान से कारण बर्बाद होने वाली नौकाओं की संख्या जहां बढ़ती जा रही है, वहीं तट पर लौटे मछुआरों की टोकरी में मछलियों की संख्या घटती जा रही है।
यह हमें याद दिलाता है कि जलवायु परिवर्तन किस तरह तटवर्ती केरल के लोगों की आजीविका को छीन रहा है। ‘जर्नल क्लाइमेट डायनमिक्स’ में प्रकाशित वर्ष 2021 के एक अध्ययन के मुताबिक अरब सागर में चक्रवाती तूफान आने की आवृत्ति में वर्ष 2001 से 2019 के बीच 52 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चक्रवाती तूफान की अवधि में 80 प्रतिशत इजाफा हुआ है, लेकिन अति गंभीर चक्रवाती तूफान आने के मामलों में 1982 और 2000 के बीच की अवधि की तुलना में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है।
केरल में तटीय समुदाय आजीविका के लिए मछली पकड़ने पर निर्भर हैं, लेकिन इन्हें अपना अस्तित्व बचाने के लिए एक गंभीर खतरे का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अगर समुद्री लहरों या तूफान के कारण उनकी नावें बर्बाद हो जाती हैं तो उनके पास कोई सहारा नहीं रह जाता।
वर्ष 2019 में दक्षिण चेल्लनम के 56 वर्षीय वी एस पोडियाल मछली पकड़ने के लिए निकले थे, लेकिन समुद्र में उनकी नाव पलट गई।
उन्होंने कहा, ‘‘जब ऊंची-ऊंची लहरें टकराने लगीं तो मेरी नाव पलट गई। हम 18 लोग थे और चार घंटे के बाद हमें बचा लिया गया था, लेकिन मेरी नाव क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसकी मरम्मत नहीं की जा सकती थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नौका की मरम्मत का कोई उपाय नहीं बचा है और सरकार की तरफ से हमारी मदद के लिए कोई योजना नहीं है। यदि उपकरण खो गये, तो सरकार से मुआवजा मिलने की कोई योजना नहीं है। कई मछुआरे इस समस्या से जूझ रहे हैं।’’
पोडियाल के बगल में खड़े पीवी विल्सन ने भी वर्ष 2021 में अपनी नौका समुद्र में गंवा दी थी जिसके बाद उन्हें मछली पकड़ने का काम छोड़ना पड़ा क्योंकि वे नयी नौका खरीदने की स्थिति में नहीं थे।
विल्सन ने कहा, ‘‘मेरी योजना अपने बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भेजने की थी, लेकिन मेरी नाव पलटने के बाद हमारे पास कोई पैसा नहीं बचा था। मेरी दो बेटियां शिक्षक बनना चाहती थीं, लेकिन पैसे के अभाव में उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।’’
दक्षिण चेल्लनम में सेंट जॉर्ज चर्च के पादरी फादर जॉन कलाथी ने कहा कि उनके क्षेत्र में 600 परिवार हैं जिनमें से 99 प्रतिशत परिवार की कमाई का साधन मछली पकड़ना है।
कलाथी ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन, मौसम, समुद्र और पानी में बदलाव के कारण स्थिति उनके लिए भयानक है। मछलियां पहले से कम मिल रही हैं, लेकिन मछली पकड़ने पर खर्च बहुत अधिक है।’’
उन्होंने कहा कि साहूकारों के कर्ज के जाल में फंसने से मछुआरों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
कलाथी ने कहा कि अपनी नौका खोने वाले ज्यादातर मछुआरों को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए साहूकारों से उच्च ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता है और वे इसमें फंस जाते हैं।
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