देश की खबरें | जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग पर त्वरित ध्यान देने की जरूरत : राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली, 14 अगस्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को दुनियाभर के वैज्ञानिकों एवं नीति निर्माताओं से जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिग पर विशेष ध्यान देने की अपील की, जिसके कारण अचानक बाढ़, सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि लोभ की संस्कृति दुनिया को प्रकृति से दूर कर रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने 77वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि ज्ञान एवं विज्ञान में उत्कृष्टता प्राप्त करना ही हमारा लक्ष्य नहीं है बल्कि हमारे लिए वे मानवता के विकास के साधन हैं।

उन्होंने कहा कि एक क्षेत्र जिस पर पूरे विश्व के वैज्ञानिक और नीति निर्माताओं को और अधिक तत्परता से ध्यान देना चाहिए वह है-जलवायु परिवर्तन।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में बड़ी संख्या में बेहद विषम मौसम की घटनाएं हुई हैं, देश के कुछ हिस्सों में असाधारण बाढ़ का सामना करना पड़ा है, कुछ स्थानों को सूखे की मार झेलनी पड़ी है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘इन सबका एक प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग को भी माना जाता है। अत: पर्यावरण के हित में स्थानीय, राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर प्रयास करना अनिवार्य है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘...इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हमने अभूतपूर्व लक्ष्यों को प्राप्त किया है, अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा अभियान को भारत ने नेतृत्व प्रदान किया है तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हमारा देश अग्रणी भूमिका निभा रहा है।’’

मुर्मू ने कहा कि विश्व समुदाय को हमने ‘‘लाइफ’’ यानी जीवनशैली के लिए पर्यावरण का मंत्र दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ असामान्य मौसम की घटनाएं सभी पर असर डालती हैं लेकिन गरीब और वंचित वर्गो के लोगों पर उनका प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन की स्थितियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से सक्षम बनाने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं यह कहना चाहूंगी कि लोभ की संस्कृति दुनिया को प्रकृति से दूर करती है और अब हमें यह एहसास हो रहा है कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि आज भी अनेक जनजातीय समुदाय ऐसे हैं जो प्रकृति के बहुत करीब हैं और उनके साथ सौहार्द बनाकर रहते हैं।

उन्होंने कहा कि इन जनजातीय समुदाय के जीवन मूल्य और जीवन शैली जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में अमूल्य शिक्षा प्रदान करते हैं।

मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समुदायों द्वारा युगों से अपना अस्तित्व बनाए रखने के रहस्य को एक शब्द ‘‘हमदर्दी’’ से ही व्यक्त किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के लोग प्रकृति को माता समझते हैं और उनकी सभी संतानों अर्थात वनस्पतियों और जीव जंतुओं के प्रति सहानुभूति रखते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ कभी-कभी दुनिया में हमदर्दी की कमी महसूस होती है। लेकिन इतिहास साक्षी है कि केवल ऐसे दौर कुछ समय के लिए ही आते हैं क्योंकि करूणा हमारा मूल स्वभाव है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा अनुभव है कि महिलाएं हमदर्दी के महत्व को अधिक गहराई से महसूस करती हैं और जब मानवता अपनी राह भटकती है तो वे सही रास्ता दिखाती हैं।’’

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