देश की खबरें | ‘जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन ने जीवाश्म ईंधन पर कार्रवाई ने करने वाले देशों को बेनकाब किया’

नयी दिल्ली, 21 सितंबर जलवायु नीति विशेषज्ञों ने बृहस्पतिवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र के जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल बंद करने का आह्वान जबरदस्त और जोरदार था और इसने मुख्य मुद्दे का सामना करने से बच रहे देशों को बेनकाब कर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु संकट पर कार्रवाई करने में प्रमुख उत्सर्जनकर्ता देशों की अनिच्छा अपमानजनक व घातक है जिसे समाप्त किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन में बुधवार को दो प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डाला गया, जिनमें उत्सर्जन करने वाले प्रमुख देशों के नेताओं की स्पष्ट अनुपस्थिति और जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए सर्वसम्मति से नेताओं का आह्वान शामिल है।

उत्सर्जन करने वाले प्रमुख देशों अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, जापान और फ्रांस के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया।

शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेताओं ने जीवाश्म ईंधन के युग को समाप्त करने के लिए लगभग सर्वसम्मति से संकल्प लिया।

‘क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल’ में वैश्विक राजनीतिक रणनीति के प्रमुख हरजीत सिंह ने कहा, "जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन में, दुनिया ने एक स्पष्ट संदेश सुना - हम एक जलवायु आपातकाल के बीच जी रहे हैं और जीवाश्म ईंधन इसका मुख्य दोषी है। फिर भी, तत्काल आवश्यक कार्रवाई नहीं की जा रही है।”

केन्या में स्थित स्वतंत्र संस्था ‘पॉवरशिफ्ट अफ्रीका’ के निदेशक मोहम्मद अडो ने कहा कि सम्मेलन में अमेरिका और ब्रिटेन सहित खराब जलवायु रिकॉर्ड वाले नेताओं ने खुद को अलग-थलग कर लिया।

‘ग्रीनपीस इंटरनेशनल’ के कार्यकारी निदेशक मैड्स क्रिस्टेंसन ने कहा, "ग्रह के सामने मौजूद भयावह संकट के दौरान इन नेताओं की जलवायु संबंधी निष्क्रियता न केवल अपमानजनक, व घातक है, बल्कि घटिया भी है जिसे समाप्त किया जाना चाहिए।”

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