देश की खबरें | सीजेआई चंद्रचूड़ ने विवाद समाधान तंत्र के रूप में मध्यस्थता की वकालत की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मुकदमेबाजी के अलावा विवाद समाधान के एक तरीके के रूप में मध्यस्थता को अपनाने और प्रोत्साहित करने की शुक्रवार को वकालत की तथा कहा कि इससे अदालतों का बोझ कम होगा और इसमें प्रतिकूल निर्णय के बजाय सहयोगी निर्णय उपलब्ध कराने की क्षमता भी है।

नयी दिल्ली, 14 अप्रैल प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने मुकदमेबाजी के अलावा विवाद समाधान के एक तरीके के रूप में मध्यस्थता को अपनाने और प्रोत्साहित करने की शुक्रवार को वकालत की तथा कहा कि इससे अदालतों का बोझ कम होगा और इसमें प्रतिकूल निर्णय के बजाय सहयोगी निर्णय उपलब्ध कराने की क्षमता भी है।

सीजेआई ने कहा कि सरकार सबसे बड़ी वादकारी है और उसे ‘एक दोस्त का चोला धारण करना चाहिए’। उन्होंने कहा कि यदि सरकार मध्यस्थता प्रक्रिया का विकल्प चुनती है, तो बाहर यह संदेश जाता है कि सरकार स्वयं विरोधी नहीं है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ दिल्ली उच्च न्यायालय में ‘समाधान’ की ओर से आयोजित ‘स्वर्ण युग की शुरुआत में मध्यस्थता’ पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।

‘समाधान’ अर्थात् दिल्ली उच्च न्यायालय मध्यस्थता और सुलह केंद्र की स्थापना मई 2006 में वैकल्पिक विवाद समाधान के एक उपयुक्त तरीके के रूप में मध्यस्थता प्रदान करने के लिए की गई थी।

सत्र के दौरान, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड में मध्यस्थता प्रक्रिया का विस्तार करने के संबंध में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

सीजेआई ने कहा, ‘‘हम मध्यस्थता के स्वर्ण युग की शुरुआत में खड़े हैं। मध्यस्थता को केवल एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि ऑनलाइन विवाद समाधान तंत्र को रणनीतिक रूप से अपनाने से भारत सरकार को लाभ होगा।

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