विदेश की खबरें | ‘एशियन ऑफ द ईयर’ सम्मान के लिए चुने गए छह लोगों में सीआईआई के पूनावाला भी शामिल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सिंगापुर के दैनिक ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ ने दुनिया के सबसे बड़े टीका निर्माता संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पूनावाला समेत छह लोगों का नाम ‘एशियन्स ऑफ द ईयर’ सम्मान के लिए चुना है। इस वर्ष कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने वालों को इस सम्मान के लिए चुना गया है।

सिंगापुर, पांच दिसंबर सिंगापुर के दैनिक ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ ने दुनिया के सबसे बड़े टीका निर्माता संस्थान सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पूनावाला समेत छह लोगों का नाम ‘एशियन्स ऑफ द ईयर’ सम्मान के लिए चुना है। इस वर्ष कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान देने वालों को इस सम्मान के लिए चुना गया है।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश-स्वीडन कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर कोविड-19 के टीके ‘कोविशिल्ड’ को विकसित करने का काम कर रहा है और इसके लिए भारत में टीके के ट्रायल किए जा रहे हैं।

यह भी पढ़े | Corona Vaccine Updates: ब्रिटेन के बाद बहरीन में कोरोना वैक्सीन Pfizer-BioNTech को मिली मंजूरी, जल्द ही शुरू होगा इस्तेमाल.

इस सूची में पूनावाला के अतिरिक्त जो पांच अन्य लोग शामिल हैं, वे हैं चीन के अनुसंधानकर्ता झांग योंगझेन जिन्होंने महामारी के जिम्मेदार सार्स-सीओवी-2 के पहले पूरे जिनोम का पता लगाने वाले दल का नेतृत्व किया, चीन के मेजर जनरल चेन वई, जापान के डॉ. युईची मोरिशिता तथा सिंगापुर के प्रोफेसर आई इंग आंग। ये सभी वे लोग हैं जो वायरस के खिलाफ टीका बनाने में आगे हैं। सूची में दक्षिण कोरिया के व्यवसायी सिओ जंग-जिन का भी नाम है, उनकी कंपनी भी टीके के निर्माण और उसे उपलब्ध करवाने का काम करेगी।

‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ के मुताबिक इन सभी लोगों को ‘द वायरस बस्टर्स’ का विशेषण दिया गया है जो अपनी क्षमतानुसार कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के प्रयास में जुटे हैं।

यह भी पढ़े | Big Ticket Lottery: भारतीय मूल के व्यक्ति ने दुबई में लकी ड्रॉ में 30 लाख अमेरिकी डॉलर का जीता इनाम.

आदर पूनावाला के पिता सायरस पूनावाला ने एसआईआई की स्थापना 1966 में की थी। 39 वर्षीय आदर ने संस्थान की कमान पूरी तरह से 2011 में संभाली।

पूनावाला ने कहा कि उनका संस्थान गरीब देशों की टीके तक पहुंच बनाने में मदद कर रहा है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\