तिरुवनंतपुरम, 25 दिसंबर केरल में ईसाई समुदाय ने रविवार को धूमधाम से क्रिसमस का त्योहार मनाया, जिसमें कुछ वरिष्ठ बिशप और पादरियों ने विझिंजम में मध्यरात्रि की प्रार्थना सभा में मछुआरों की दुर्दशा, बफर जोन और राज्य में सांप्रदायिक गतिविधियों जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला।
उत्सव आधी रात की सामूहिक प्रार्थना के साथ शुरू हुआ, जो राज्य भर के गिरजाघरों में आयोजित की गई, जहां बिशप और पादरियों ने अपनी-अपनी सभाओं को क्रिसमस का संदेश दिया।
राज्य की राजधानी में सिरो मालंकारा कैथोलिक चर्च के सेंट मैरी कैथेड्रल में कार्डिनल मार बेसेलियोस क्लीमिस ने आधी रात की प्रार्थना सभा का नेतृत्व किया, वहीं सिरो मालाबार कैथोलिक चर्च के कार्डिनल मार जॉर्ज एलनचेरी ने कोच्चि में प्रार्थना सभा का संचालन किया।
एलनचेरी ने अपने क्रिसमस संदेश में कहा कि अगर लोग सांप्रदायिकता के आगे घुटने टेक दें और एक-दूसरे से दूर रहें, तो ‘‘इससे उन्हें ही नुकसान होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी को एकजुट और सद्भाव में एक साथ खड़े होना है।’’ उन्होंने मछुआरों की दुर्दशा पर भी प्रकाश डाला।
तिरुवनंतपुरम के लैटिन कैथोलिक आर्चडाइअसीस के आर्कबिशप थॉमस जे. नेट्टो ने भी अपने क्रिसमस संदेश में उन मछुआरों की दुर्दशा का उल्लेख किया, जिन्होंने निर्माणाधीन समुद्री बंदरगाह के खिलाफ विझिंजम में विरोध-प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा, ‘‘विकास के नाम पर जो गोदामों में रह रहे हैं, उन्हें भी हमें याद रखना चाहिए।’’
अपनी प्रार्थना सभा में कोझिकोड जिले के थमारसेरी डाइअसीस के बिशप रेमिगियोस इंचानानिइल ने मौजूदा बफर जोन के मुद्दे और विशेष रूप से राज्य के जंगलों तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को उजागर किया।
उन्होंने कहा, ‘‘लोग इस डर में जी रहे हैं कि उन्हें उनके घरों से बेदखल कर दिया जाएगा।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY