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भूख चुनो या बलात्कार

डीआर कॉन्गो में विस्थापितों के एक कैंप में हर दिन बलात्कार और यौन अपराधों के करीब 70 मामले सामने आते हैं.

भूख चुनो या बलात्कार
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

डीआर कॉन्गो में विस्थापितों के एक कैंप में हर दिन बलात्कार और यौन अपराधों के करीब 70 मामले सामने आते हैं. सबके पीछे एक ही कहानी है, भूख चुनो या बलात्कार.डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (DRC) की पैट्रिशिया की आंखें पथरा चुकी हैं. 15 साल की यह बच्ची अब सारा दिन उदास बैठी रहती है. कुछ महीने पहले खाने की तलाश में वह विस्थापितों के लिए बनाए गए रुसायो कैंप से बाहर निकली. तभी गोमा शहर के पास हथियारबंद मर्दों ने उससे बलात्कार किया.

ऐसा झेलने वाली पैट्रिशिया (बदला हुआ नाम) अकेली नहीं है. DRC की हजारों महिलाएं और किशोरियां बलात्कार का शिकार हो चुकी हैं. गोमा शहर के बाहरी इलाके में विस्थापितों के लिए रुसायो कैंप बनाया गया है.

खेतों में बनाए गए इस शिविर में लाखों लोग ठूंस दिए गए हैं. ये सभी 2021 के आखिर में शुरू हुए सैन्य संघर्ष के भुक्तभोगी हैं. सेना की एक टुकड़ी के विद्रोह करने के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ. बगावत करने वालों को M23 विद्रोही कहा जाता है.

मर्दों की जंग में पिसती महिलाएं

अमेरिका और फ्रांस समेत कई पश्चिमी देशों का मानना है कि पड़ोसी देश रवांडा तुत्सी नेतृत्व वाले M23 विद्रोहियों की मदद कर रहा है. रवांडा इन आरोपों से इनकार करता है. फिलहाल DRC का उत्तरी प्रांत किवु, M23 विद्रोहियों के नियंत्रण में है.

पैट्रिशिया और उनका परिवार 2023 की शुरुआत में उत्तरी किवु से भागा. रास्ते में मारपीट और लूटपाट झेलने के बाद वे गोमा के पास रुसायो कैंप तक पहुंचे. इसी दौरान गर्मियों की एक घटना का जिक्र करते हुए पैट्रिशिया की मां कहती हैं, "मैंने आलू खोदने के लिए उसे गांव भेजा, क्योंकि हम भूखे थे."

रवांडा: बलात्कार से पैदा हजारों बच्चों के रिसते जख्म

पैट्रिशिया कई हफ्तों तक नहीं लौटी. परिवार को लगा कि वह मर चुकी है. कुछ महीने बाद सितंबर के आखिर में एक लड़की चेहरा ढंककर कैंप में पहुंची. वह पैट्रिशिया थी. उसने बताया कि हुतू लड़ाकों ने उसे अगवा किया. उनमें से एक ने कई हफ्तों तक उससे बलात्कार किया. एक सुबह पानी भरने का बहाना बनाकर पैट्रिशिया भाग निकली.

यौन अपराधों का शर्मनाक इतिहास

पूर्वी DRC में हिंसक अशांति के दौरान बलात्कार और यौन अपराध नई बात नहीं हैं. यह बीते 30 साल से हो रहा है. सेवार्थ संगठन, डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (MSF) से जुड़ी सैंड्रा काविरा को पैट्रिशिया की मां से बेटी के बलात्कार की बात पता चली.

जुलाई से रुसायो कैंप में काम कर रहीं 28 साल की काविरा कहती हैं, "हमारे सामने रोज 10 नए मामले आते हैं. कुछ में तो पीड़ित चार साल की बच्ची से लेकर 80 साल की दादी तक होती हैं."

18 साल की एक युवती की पहचान छिपाने के लिए समाचार एजेंसी AFP ने उसे शारमांते नाम दिया. शारमांते ने हाल ही एक बच्चे को जन्म दिया है. लकड़ी बीनने के लिए रुसायो कैंप से बाहर गई शारमांते के साथ सैनिक वर्दी पहने एक पुरुष ने बलात्कार किया. वह बताती हैं, "जब उसका जी भर गया, तो मैं चल भी नहीं पा रही थी. मेरे दोस्त मुझे वापस कैंप में लाए."

शरमांते की दो सहेलियों और उनकी 19 साल की बहन के साथ भी कैंप से बाहर निकलते ही बलात्कार किया गया. समाचार एजेंसी AFP ने रुसायो कैंप में जितनी महिलाओं से बात की, उन सबने यही कहा कि उन्हें भूखे रहने या खाना जुटाने के लिए बाहर निकलने और उससे जुड़े खतरे के बीच चुनाव करना पड़ता है.

43 साल की रोज इस डर को जानती हैं. जून में वह अपने सात बच्चों के साथ लगातार तीन दिन तक पैदल चलकर रुसायो कैंप पहुंची. इस दौरान तीन सहेलियां भी रोज के साथ थीं. रोज रोते हुए कहती हैं, "हम सबके साथ बलात्कार किया गया."

पहले ही कैंप पहुंच चुके रोज के पति को जब बलात्कार का पता चला, तो उसने पहले अपनी पत्नी को पीटा और फिर परिवार को छोड़कर चला गया.

रोज कहती हैं, "यहां कैंप में जब हम दूसरी महिलाओं और लड़कियों को देखते हैं, तो यही कहते हैं, "तुम्हारे साथ भी यह हुआ."

एक कैंप में हर हफ्ते रिपोर्ट होते करीब 70 मामले

आर्मेल जादी, MSF में काविरा की सुपरवाइजर हैं. उन्हें याद है कि कैसे तीसरी बार गैंगरेप का शिकार होने वाली एक महिला चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गई. जादी कहती हैं, "इसके बाद उसकी बेटी के पास परिवार का पेट भरने के लिए देह व्यापार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था. महिलाएं इसी दुष्चक्र में कैद हैं."

गोमा में MSF के इमरजेंसी कोऑर्डिटेनर ब्रायन मोलर के मुताबिक हर दिन करीब 70 महिलाएं इलाज के लिए उनके पास आती हैं. अगर इस संख्या को महीनेवार रूप से देखा जाए, तो हर महीने 2000 से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां यौन हिंसा का शिकार बनती हैं.

मोलर कहते हैं, "यह संख्या सच्चाई का सिर्फ एक कोना दिखाती हैं. ये तो सिर्फ उस जगह से आ रही हैं, जहां MSF काम कर रहा है. बाकी जगहों का क्या?"

ओएसजे/वीएस (एएफपी)

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 06, 2023 03:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).