देश की खबरें | चीन की जलविद्युत परियोजना जल सुरक्षा के लिए खतरा : खांडू

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ईटानगर, 24 जनवरी अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की कि पड़ोसी देश चीन की यारलुंग सांगपो नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना की योजना का राज्य और असम पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

चीन में यारलुंग सांगपो के नाम से प्रवाहित होने वाली नदी को भारत में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है।

यहां ‘पर्यावरण और सुरक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए खांडू ने कहा कि बांध से चीन को नीचे की ओर प्रवाहित पानी की मात्रा को नियंत्रित करने का मौका मिल जाएगा, जिससे कम प्रवाह या सूखे के समय में विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘सियांग या ब्रह्मपुत्र नदी सर्दियों के दौरान सूख जाएगी, जिससे सियांग क्षेत्र और असम के मैदानी इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो जायेगा।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में भी भयंकर बाढ़ आ सकती है, खासकर मानसून के मौसम में, जिससे समुदाय विस्थापित हो सकते हैं, फसलें नष्ट हो सकती हैं और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे कृषि भूमि प्रभावित होगी जो नदी के प्राकृतिक पोषक तत्वों पर निर्भर है।

उन्होंने कहा, ‘‘यारलुंग सांगपो नदी पर चीन द्वारा दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध का निर्माण अरुणाचल प्रदेश, असम और बांग्लादेश में रहने वाले लाखों लोगों की जल सुरक्षा, पारिस्थितिकी और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है। जल प्रवाह, बाढ़ और पारिस्थितिकी तंत्र के क्षरण के संभावित व्यवधान के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।’’

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि भारत की सभी प्रमुख नदियां तिब्बती पठार से निकलती हैं, खांडू ने दावा किया कि तिब्बत के प्राकृतिक संसाधनों का चीनी सरकार द्वारा किया जा रहा दोहन इन नदी प्रणालियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है, जिन पर लाखों भारतीय निर्भर हैं।

इस महीने की शुरुआत में चीन ने भारतीय सीमा के निकट तिब्बत में विश्व का सबसे बड़ा बांध बनाने की अपनी योजना दोहराते हुए कहा था कि प्रस्तावित परियोजना का वैज्ञानिक सत्यापन हो चुका है और इससे नदी के निचले हिस्से में स्थित देशों भारत और बांग्लादेश पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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